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AI से नौकरियां जाएंगी या नए अवसर आएंगे? PM मोदी ने इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में दूर किए सारे भ्रम

नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर दुनिया भर में मची हलचल के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भविष्य की संभावनाओं और चुनौतियों पर खुलकर बात की है। 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026' के उद्घाटन के अवसर पर न्यूज एजेंसी ANI को दिए एक विशेष इंटरव्यू में पीएम मोदी ने युवाओं के मन में नौकरियों को लेकर बैठे डर को संबोधित किया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि डर का सबसे प्रभावी इलाज 'तैयारी' है और भारत इस तकनीक को चुनौती के बजाय एक बड़े अवसर के रूप में देख रहा है।

नौकरियों का डर और सरकार की तैयारी
जब पीएम मोदी से पूछा गया कि क्या AI युवाओं की नौकरियां छीन लेगा, तो उन्होंने बहुत ही व्यावहारिक जवाब दिया। उन्होंने कहा, "इतिहास गवाह है कि तकनीकी क्रांतियां काम खत्म नहीं करतीं, बल्कि उसका स्वरूप बदल देती हैं।" पीएम ने जोर देकर कहा कि तकनीक मानवता की जगह लेने के लिए नहीं, बल्कि उसकी सेवा के लिए है। सरकार वर्तमान में लोगों की स्केलिंग (Skilling) और री-स्किलिंग (Re-skilling) पर भारी निवेश कर रही है ताकि हमारा वर्कफोर्स AI-आधारित भविष्य के लिए तैयार रहे। उन्होंने इसे 'भविष्य की समस्या' के बजाय 'वर्तमान की आवश्यकता' बताया।
विकसित भारत 2047 में AI की भूमिका
प्रधानमंत्री ने 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को प्राप्त करने में AI को एक महत्वपूर्ण इंजन बताया। उन्होंने अमूल (Amul) का उदाहरण देते हुए कहा कि कैसे 36 लाख महिलाओं तक पहुँचने के लिए AI का उपयोग किया जा रहा है। पीएम के अनुसार, जहाँ दुनिया AI से बढ़ती असमानता को लेकर चिंतित है, वहीं भारत इसका उपयोग स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और आर्थिक अवसरों को हर गांव और हर नागरिक तक पहुँचाकर खाई को पाटने के लिए कर रहा है।
टेक्नोलॉजी का अंतिम लक्ष्य 'सर्वे भवन्तु सुखिनः' यानी सभी का कल्याण और सभी की खुशी होना चाहिए।" — PM नरेंद्र मोदी
AI के दुरुपयोग और डीपफेक पर सख्त रुख
AI की सीमाओं और इसके दुरुपयोग (Misuse) पर चिंता जताते हुए प्रधानमंत्री ने वैश्विक समझौते की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि AI प्रणालियों में लिंग, भाषा और सामाजिक-आर्थिक पूर्वाग्रह हो सकते हैं, जिन्हें दूर करना जरूरी है। पीएम ने स्पष्ट किया कि निर्णय लेने की अंतिम जिम्मेदारी हमेशा इंसान के पास ही रहनी चाहिए। उन्होंने डीपफेक, साइबर अपराध और आतंकवादी गतिविधियों में AI के इस्तेमाल पर सख्त प्रतिबंध और 'सुरक्षा-आधारित डिजाइन' की वकालत की।
आईटी सेक्टर का होगा कायाकल्प
भारतीय इंजीनियरिंग टैलेंट पर बात करते हुए पीएम ने कहा कि AI हमारे आईटी सेक्टर को रिप्लेस नहीं कर रहा, बल्कि उसे 'ट्रांसफॉर्म' कर रहा है। 'इंडिया एआई मिशन' के माध्यम से सरकार का लक्ष्य भारत को केवल सर्विस प्रोवाइडर तक सीमित रखना नहीं है, बल्कि दुनिया के लिए उपयोगी AI उत्पाद और प्लेटफॉर्म बनाने में अग्रणी बनाना है। इस समिट का मूल मंत्र 'पीपुल्स, प्लैनेट और प्रोग्रेस' है, जो यह सुनिश्चित करेगा कि तकनीक का लाभ कुछ चुनिंदा लोगों तक न रहकर समाज के हर वर्ग तक पहुँचे।







