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सूखे जंगल तो बस्तियों में उमड़े बेजुबान, कहीं टंकी में भालू तो कहीं हैंडपंप चलाते दिखे बंदर

RRT News- छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में नौतपा से पहले ही पड़ रही भीषण गर्मी ने इंसानों के साथ-साथ वन्यजीवों का जीना मुहाल कर दिया है। पथरीले और जंगली इलाकों में बने प्राकृतिक जलस्रोत पूरी तरह सूख चुके हैं, जिसके कारण अब भालू, बंदर और अन्य जंगली जानवर पानी की तलाश में रिहायशी इलाकों की ओर रुख कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में एक भालू को ग्रामीण के घर की छत पर रखी पानी की टंकी में आराम फरमाते और नहाते देखा गया है, जो जंगल में गहराते जल संकट की भयावह तस्वीर पेश करता है।

हैरान कर देने वाला नजारा तब और बढ़ गया जब बंदरों का एक झुंड हैंडपंप पर अपनी प्यास बुझाता दिखा। प्यास की शिद्दत इतनी थी कि बंदरों ने इंसानी तकनीक का इस्तेमाल करते हुए खुद हैंडपंप चलाना सीख लिया है। ग्रामीणों के अनुसार, सुबह और शाम के वक्त जंगली जानवरों का झुंड पानी की टंकियों और सार्वजनिक नलों के पास जमा हो रहा है। हालांकि, यह नजारा कौतूहल पैदा करता है, लेकिन इसके पीछे छिपी बेजुबानों की मजबूरी प्रशासन के जल प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
इंसानी बस्तियों में वन्यजीवों की बढ़ती घुसपैठ से अब जनहानि का खतरा भी बढ़ गया है। भालू जैसे हिंसक जानवरों का घरों के आंगन तक पहुंचना ग्रामीणों में दहशत पैदा कर रहा है। वन विभाग का दावा है कि जंगलों के भीतर कृत्रिम रूप से पानी की व्यवस्था की जा रही है, लेकिन धरातल पर वन्यजीवों का गांव की ओर पलायन कुछ और ही कहानी बयां कर रहा है। पर्यावरण प्रेमियों ने मांग की है कि वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास में ही पानी मिले, ताकि 'मैन-एनिमल कॉन्फ्लिक्ट' की स्थिति को टाला जा सके।







