Breaking

पश्चिम बंगाल की राजनीति: ममता बनर्जी के मजबूत किले में कैसे हुई बीजेपी की सेंधमारी? जानें अंदरूनी समीकरण

Political 05 May 2026 (49)

post

बंगाल- Iपश्चिम बंगाल की राजनीति में पिछले कुछ वर्षों में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वर्चस्व वाले इस राज्य में, जहाँ कभी वामपंथियों का दशकों तक राज रहा, वहाँ भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने एक प्रमुख विपक्षी दल के रूप में खुद को स्थापित कर लिया है। ममता बनर्जी के 'मजबूत किले' में बीजेपी की इस एंट्री ने न केवल राज्य के चुनावी समीकरणों को बदला है, बल्कि राजनीतिक विश्लेषकों को भी हैरान कर दिया है। ध्रुवीकरण और जमीनी स्तर पर संगठन के विस्तार ने बीजेपी को बंगाल के चुनावी मैदान में एक मजबूत दावेदार बना दिया है।

Advertisement

बीजेपी की इस सफलता के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण माने जा रहे हैं। जानकारों के अनुसार, पार्टी ने उन क्षेत्रों और समुदायों पर ध्यान केंद्रित किया जहाँ सत्ता विरोधी लहर (Anti-incumbency) का असर था। मतुआ समुदाय और आदिवासी बहुल क्षेत्रों में पैठ बनाने के साथ-साथ, बीजेपी ने 'जय श्री राम' के नारे को एक राजनीतिक पहचान के रूप में इस्तेमाल किया। इसके अलावा, राज्य में भ्रष्टाचार और स्थानीय स्तर पर टीएमसी कार्यकर्ताओं के कथित दबदबे को भी बीजेपी ने अपने अभियान का मुख्य मुद्दा बनाया, जिससे उसे शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में समर्थन हासिल करने में मदद मिली।

ममता बनर्जी ने अपनी 'लोकप्रिय योजनाओं' (जैसे स्वास्थ्य साथी और लक्ष्मी भंडार) के जरिए बीजेपी की इस चुनौती का डटकर मुकाबला किया है। बंगाल की राजनीति अब पूरी तरह से दो ध्रुवों—टीएमसी और बीजेपी—के बीच सिमट गई है, जिसमें कांग्रेस और वामदल हाशिए पर चले गए हैं। यह देखना दिलचस्प है कि दीदी के 'मिट्टी-मानुष' के नारे के सामने बीजेपी का 'परिवर्तन' का एजेंडा आने वाले समय में कितनी दूर तक जाता है। बंगाल की यह राजनीतिक जंग अब केवल सत्ता की लड़ाई नहीं, बल्कि अस्मिता और विचारधारा की लड़ाई बन चुकी है।

You might also like!