Breaking

पानी के लिए 'त्राहिमाम': 800 फीट नीचे गया भूजल स्तर, अब 'वॉटर हार्वेस्टिंग' ही आखिरी सहारा!

Chhattisgarh 21 April 2026 (31)

post

RRT News- छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर इन दिनों अपनी सबसे बड़ी चुनौती 'पानी की किल्लत' का सामना कर रही है। भीषण गर्मी के बीच भूजल स्तर (Groundwater Level) इतनी तेजी से नीचे गिरा है कि शहर के कई इलाकों में 800 फीट गहराई तक बोरिंग करने के बावजूद पानी नहीं मिल रहा है। स्थिति इतनी गंभीर है कि टैंकर आते ही लोग बर्तन लेकर टूट पड़ते हैं और कई जगहों पर पानी के लिए संघर्ष की खबरें आम हो गई हैं।

Advertisement

संकट की भयावह तस्वीर:

800 फीट तक सूखा: विशेषज्ञों के अनुसार, पहले जो पानी 300-400 फीट पर मिल जाता था, वह अब 800 फीट तक गायब हो चुका है। शंकर नगर, कचना, और राजेंद्र नगर जैसे इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।

टैंकरों पर निर्भरता: नगर निगम की पाइपलाइन फेल होने के कारण लोग अब पूरी तरह से निजी और सरकारी टैंकरों पर निर्भर हैं। कई मोहल्लों में टैंकर पहुंचते ही धक्का-मुक्की के दृश्य आम हो गए हैं।

प्रशासनिक सख्ती: नगर निगम प्रशासन ने अब बड़े बिल्डर्स और निजी कॉलोनियों की जांच शुरू कर दी है ताकि अवैध जल दोहन पर लगाम लगाई जा सके।

क्यों आई यह नौबत?

अंधाधुंध कंक्रीटाइजेशन: शहर के प्राकृतिक जल स्रोतों (तालाब, कुएं) को पाटकर बनी कालोनियों ने पानी के जमीन में रिसने (Recharge) के रास्तों को बंद कर दिया है।

वॉटर हार्वेस्टिंग की अनदेखी: राजधानी के करीब 3.50 लाख घरों में से मात्र 20% से भी कम घरों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम सही ढंग से काम कर रहे हैं।

अत्यधिक दोहन: बढ़ती आबादी और निर्माण कार्यों में भूजल का अंधाधुंध इस्तेमाल ने स्थिति को बदतर बना दिया है।

आखिरी विकल्प: 'वॉटर हार्वेस्टिंग'

भूजल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शहर को आने वाले सालों में रेगिस्तान बनने से बचाना है, तो अब केवल दो ही रास्ते हैं:

अनिवार्य हार्वेस्टिंग: हर घर और बिल्डिंग में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगवाना और उसे चालू रखना।

तालाबों का संरक्षण: शहर के पुराने तालाबों को पुनर्जीवित करना ताकि वे मानसून में बारिश का पानी संचित कर सकें और आसपास के इलाकों का जलस्तर बनाए रखें।

प्रशासन की अपील और तैयारी

नगर निगम अब इस मामले में और भी सख्त रुख अपनाने की तैयारी में है। निगम आयुक्त ने जोन स्तर पर अधिकारियों को पेयजल व्यवस्था की नियमित निगरानी के निर्देश दिए हैं। हालांकि, प्रशासन के इंतजामों के बावजूद, नागरिकों को भी पानी की बर्बादी रोकने और संरक्षण के प्रति जागरूक होना ही होगा।

You might also like!