रायपुर। छत्तीसगढ़ के चर्चित धोखाधड़ी मामले में फंसे विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी को अदालत से एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने उनकी दूसरी जमानत याचिका को भी खारिज कर दिया है। इंदिरा IVF के फाउंडर द्वारा लगाए गए 30 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के आरोपों के चलते दोनों बीते 7 दिसंबर से न्यायिक हिरासत में हैं।
अदालत ने मामले की गंभीरता और जांच की वर्तमान स्थिति को देखते हुए उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया। अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि यदि आरोपी बाहर आते हैं, तो वे साक्ष्यों को प्रभावित कर सकते हैं।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा विवाद देश की मशहूर फर्टिलिटी चेन 'इंदिरा IVF' के फाउंडर की शिकायत के बाद शुरू हुआ।
आरोप: विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी पर व्यापारिक सौदों और निवेश के नाम पर करीब 30 करोड़ रुपये की हेराफेरी करने का गंभीर आरोप है।
गिरफ्तारी: लंबी पूछताछ और प्राथमिक साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने उन्हें इसी महीने की शुरुआत में गिरफ्तार किया था।
[यहाँ विक्रम भट्ट की पेशी या कोर्ट परिसर की सांकेतिक तस्वीर लगाएं]
7 दिसंबर से जेल में हैं भट्ट दंपत्ति
अपनी गिरफ्तारी के बाद से ही विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी लगातार जेल में हैं। इससे पहले उनकी पहली जमानत याचिका को निचली अदालत ने खारिज कर दिया था, जिसके बाद उन्होंने दोबारा आवेदन किया था। बचाव पक्ष के वकीलों का कहना था कि वे जांच में सहयोग कर रहे हैं और हिरासत की आवश्यकता नहीं है, लेकिन कोर्ट ने इन दलीलों को पर्याप्त नहीं माना।
इंदिरा IVF के फाउंडर के संगीन आरोप
शिकायतकर्ता के अनुसार, विश्वास का फायदा उठाकर बड़ी धनराशि का गबन किया गया और दस्तावेजों में हेरफेर की गई। इस हाई-प्रोफाइल मामले ने शहर के व्यापारिक गलियारों में भी काफी हलचल पैदा कर दी है। पुलिस अब इस मामले के वित्तीय लेन-देन और बैंक खातों की गहनता से जांच कर रही है ताकि धोखाधड़ी की पूरी चैन का पता लगाया जा सके।
अगला कदम
जमानत याचिका खारिज होने के बाद अब भट्ट दंपत्ति के पास हाईकोर्ट का रुख करने का विकल्प बचा है। फिलहाल, उन्हें न्यायिक हिरासत में ही रहना होगा। पुलिस इस मामले में जल्द ही चार्जशीट पेश करने की तैयारी में है।








