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बहरीन में US एयरबेस तबाह, ट्रंप ने ईरान को चेताया—बोले, 'हथियारों की कमी नहीं'

मिडिल ईस्ट में जारी भीषण संघर्ष के बीच ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए बहरीन स्थित अमेरिकी एयरबेस (Sheikh Isa Airbase) पर बड़ा हमला किया है। ईरानी मीडिया और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के दावों के अनुसार, इस हमले में एयरबेस का मुख्य कमांड सेंटर पूरी तरह तबाह हो गया है और ईंधन टैंकों में भीषण आग लग गई है। बताया जा रहा है कि ईरान ने लगभग 20 ड्रोन और 3 बैलिस्टिक मिसाइलों के जरिए इस ऑपरेशन को अंजाम दिया। इस हमले के बाद बहरीन सहित पूरे खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सेना को हाई अलर्ट पर रखा गया है।

दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को विनाशकारी परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है। एक हालिया संबोधन में ट्रंप ने गर्व से कहा कि अमेरिका के पास हथियारों की 'अनलिमिटेड सप्लाई' है और वे इस युद्ध को जब तक चाहें तब तक लड़ सकते हैं। ट्रंप ने सीधे तौर पर ईरानी शासन को निशाने पर लेते हुए कहा कि यदि उन्होंने अपनी परमाणु जिद और हमलों को नहीं रोका, तो अमेरिका अपनी पूरी सैन्य ताकत झोंक देगा। ट्रंप के इस बयान ने संकेत दे दिए हैं कि अमेरिका अब पीछे हटने के मूड में नहीं है।
इजरायल की वायुसेना ने भी अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेहरान और बेरूत में कई रणनीतिक ठिकानों पर भीषण बमबारी की गई है। इजरायली डिफेंस फोर्सेज (IDF) ने दावा किया है कि उन्होंने ईरान के मिसाइल लॉन्चिंग पैड्स और हथियार डिपो को चुन-चुनकर निशाना बनाया है। इस युद्ध में अब तक सैकड़ों लोगों के मारे जाने की खबर है और ईरान के सर्वोच्च नेता के मारे जाने की अपुष्ट खबरों के बाद तनाव चरम पर पहुंच गया है। कई देशों ने अपने नागरिकों को तुरंत मिडिल ईस्ट छोड़ने की सलाह दी है।
इस युद्ध का असर पूरी दुनिया पर दिखने लगा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) के पास बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति ठप होने का खतरा मंडरा रहा है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी जैसे यूरोपीय देशों ने भी अमेरिका और इजरायल के रुख का समर्थन किया है, जबकि चीन ने ईरान के हितों की रक्षा की बात कही है। फिलहाल, अंतरराष्ट्रीय कूटनीति इस संकट को टालने में विफल नजर आ रही है और दुनिया एक बड़े वैश्विक युद्ध की आशंका से कांप रही है।







