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ईरान जंग का असर: अमेरिका ने भारत को दी 30 दिन की 'ऑयल छूट'; समुद्र में फंसे रूसी तेल को खरीद सकेगा भारत

वाशिंगटन/नई दिल्ली। अमेरिका के ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट (Scott Bessent) ने शुक्रवार (6 मार्च 2026) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक बड़ी घोषणा की। उन्होंने बताया कि मध्य पूर्व में संघर्ष के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति (Global Oil Supply) पर पड़ रहे दबाव को कम करने के लिए भारत को 30 दिनों का अस्थायी 'सैंक्शंस वेवर' दिया जा रहा है। यह कदम विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में ईरान द्वारा संभावित ब्लॉकेड और सप्लाई में आ रही बाधाओं को देखते हुए उठाया गया है।

छूट की प्रमुख शर्तें और कारण:
फंसा हुआ तेल (Stranded Oil): यह छूट मुख्य रूप से उस रूसी कच्चे तेल के लिए है जो वर्तमान में समुद्र में टैंकरों पर लदा हुआ है (Loaded on or before March 5, 2026) लेकिन प्रतिबंधों के कारण भारत नहीं पहुँच पा रहा था।
रूस को लाभ नहीं: अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि यह 'स्टॉप-गैप' उपाय रूस को कोई बड़ा वित्तीय लाभ नहीं पहुँचाएगा, क्योंकि यह केवल उन सौदों के लिए है जो पहले से ही ट्रांजिट में हैं।
समय सीमा: यह लाइसेंस 4 अप्रैल 2026 तक वैध रहेगा।
ईरान का संकट: ईरान और इजराइल/अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव (विशेषकर 28 फरवरी के सैन्य हमलों के बाद) ने खाड़ी देशों से होने वाली तेल आपूर्ति को जोखिम में डाल दिया है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 40% तेल इसी क्षेत्र से मंगाता है।
अमेरिका की रणनीति:
ट्रेजरी सचिव बेसेंट ने स्पष्ट किया कि भारत अमेरिका का एक "अनिवार्य भागीदार" (Essential Partner) है। अमेरिका चाहता है कि इस आपातकालीन स्थिति में वैश्विक तेल की कीमतें न बढ़ें। हालांकि, वाशिंगटन ने यह भी संकेत दिया है कि वह भविष्य में भारत द्वारा अमेरिकी कच्चे तेल की खरीद में बढ़ोतरी की उम्मीद करता है।







