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ईरान-अमेरिका तनाव: ट्रंप की धमकी के बाद बंकर में सिमटे खामेनेई, भारत का जताया आभार...

मीडिया रिपोर्ट्स (जैसे ईरान इंटरनेशनल) के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर "भारी बल प्रयोग" की चेतावनी देने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को एक अत्याधुनिक और सुरक्षित भूमिगत बंकर में स्थानांतरित कर दिया है। यह कदम तब उठाया गया जब अमेरिकी विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन और कई मिसाइल विध्वंसक हिंद महासागर से होते हुए खाड़ी क्षेत्र की ओर बढ़ रहे हैं। ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि यह तैनाती ईरान की किसी भी दुस्साहस का जवाब देने के लिए की गई है।

भारत को धन्यवाद देने के पीछे का बड़ा कारण
इतने भीषण तनाव के बीच ईरान ने भारत को सार्वजनिक रूप से धन्यवाद दिया है। इसका मुख्य कारण संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) में भारत का रुख रहा है। दरअसल, यूएन में ईरान के मानवाधिकार रिकॉर्ड की जांच के लिए लाए गए एक कड़े प्रस्ताव के खिलाफ भारत ने अपना मत दिया (या विरोध किया)। ईरान के राजदूत मोहम्मद फताली ने भारत के इस कदम को "सिद्धांतवादी और दृढ़" बताते हुए नई दिल्ली का आभार व्यक्त किया। ईरान इसे मुश्किल समय में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक समर्थन मान रहा है।
ट्रंप की 'अर्माडा' और ईरान की 'किल स्विच'
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने बयानों में "अर्माडा" (विमानवाहक पोतों का बेड़ा) शब्द का इस्तेमाल कर सीधे तौर पर सैन्य हमले के संकेत दिए हैं। इसके जवाब में ईरान ने भी कड़े तेवर दिखाए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने देश में 'इंटरनेट ब्लैकआउट' लागू किया है जिसे 'किल स्विच' कहा जा रहा है, ताकि बाहरी हस्तक्षेप और जासूसी को रोका जा सके। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने भी चेतावनी दी है कि उनके हाथ "ट्रिगर पर" हैं।
बंकर से चल रहा है शासन
बंकर में जाने के बाद खामेनेई के कार्यालय का दैनिक कामकाज उनके तीसरे बेटे, मसूद खामेनेई संभाल रहे हैं। मसूद ही इस समय सरकार और सैन्य नेतृत्व के बीच संचार की मुख्य कड़ी बने हुए हैं। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने भी दुनिया को आगाह किया है कि सुप्रीम लीडर पर कोई भी हमला ईरान के खिलाफ "पूर्ण युद्ध" की घोषणा माना जाएगा, जिसका परिणाम पूरे क्षेत्र के लिए विनाशकारी होगा।
भारत की संतुलित भूमिका
भारत के लिए यह स्थिति बेहद नाजुक है। एक ओर जहाँ अमेरिका के साथ भारत के सामरिक रिश्ते मजबूत हैं, वहीं ईरान के साथ व्यापारिक और चाबहार पोर्ट जैसे प्रोजेक्ट्स के कारण भारत वहां भी अपना प्रभाव बनाए रखना चाहता है। भारत ने हमेशा इस क्षेत्र में शांति और बातचीत के जरिए समाधान की वकालत की है। यूएन में ईरान का पक्ष लेना भारत की अपनी संप्रभुता और स्वतंत्र विदेश नीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिससे ईरान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर थोड़ी राहत मिली है।







