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आदिवासी उद्यमिता की नई उड़ान! जशपुर के वन धन विकास केंद्र ने रचा इतिहास, खड़ा किया ₹1.91 करोड़ का टर्नओवर

Chhattisgarh RRT News Desk 11 June 2026

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छत्तीसगढ़ के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के कुशल नेतृत्व और दूरदर्शी मार्गदर्शन में प्रदेश के वनांचल क्षेत्रों में लघु वनोपज आधारित आजीविका और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक अभूतपूर्व व नई दिशा मिल रही है। इसका सबसे उत्कृष्ट और जीता-जागता उदाहरण जशपुर जिले का वन धन विकास केंद्र (VDVK) पंचक्की बनकर उभरा है। इस केंद्र के माध्यम से सदियों से जंगलों में रहने वाले और कभी दिहाड़ी मजदूरी पर पूरी तरह निर्भर उरांव आदिवासी समुदाय के लोगों ने आज सामूहिक रूप से ₹1.91 करोड़ का सफल बिजनेस (कारोबार) खड़ा कर दिया है। यह बड़ी उपलब्धि वनांचल क्षेत्र में ग्रामीण उद्यमिता और आत्मनिर्भरता की एक बेहद अनूठी और प्रेरक मिसाल प्रस्तुत करती है।

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वन मंत्री केदार कश्यप की यह स्पष्ट सोच और नीति रही है कि जंगलों से मिलने वाली अमूल्य लघु वनोपज केवल संग्रहण (इकट्ठा करने) और स्थानीय बाजारों में कम दामों में बेचने तक ही सीमित न रहे। बल्कि, वनों में रहने वाले लोगों को उसका मूल्य संवर्धन (Value Addition) करने की तकनीक सिखाई जाए, जिससे आदिवासी परिवारों की आय और उनके जीवन स्तर में स्थायी व बड़ा सुधार लाया जा सके। इसी उद्देश्य को धरातल पर साकार करने के लिए छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ और ट्राइफेड के संयुक्त सहयोग से प्रदेश के वन धन विकास केंद्रों को लगातार सशक्त और सर्वसुविधायुक्त बनाया जा रहा है।

'प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन' के अंतर्गत संचालित जशपुर के इस केंद्र में स्थानीय आदिवासी कारीगरों को आधुनिक मशीनों के संचालन, वैज्ञानिक प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग) तकनीकों और बेहतरीन पैकेजिंग व विपणन (मार्केटिंग) संबंधी उच्च स्तरीय प्रशिक्षण से जोड़ा गया। इसके सुखद परिणाम यह रहे कि यहां के पारंपरिक वैद्यों और उरांव समुदाय के युवाओं ने स्थानीय स्तर पर उपलब्ध औषधीय जड़ी-बूटियों और वनोपजों को प्रसंस्करित कर उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों में बदला और उन्हें ‘छत्तीसगढ़ हर्बल्स’ ब्रांड के तहत बाजार में उतारा। इस शुद्ध और प्राकृतिक ब्रांड को देश-विदेश के उपभोक्ताओं का व्यापक विश्वास और भारी समर्थन मिला।

इस शानदार पहल के चलते केंद्र से जुड़े सैकड़ों आदिवासी परिवारों का रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में होने वाला पलायन पूरी तरह रुक गया है। आज ये परिवार अपने ही गांव और जंगल के नजदीक रहकर सम्मानजनक और नियमित आय अर्जित कर रहे हैं। इस वित्तीय मजबूती से उनके बच्चों को उच्च शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और एक उन्नत जीवन शैली मिल रही है। वन मंत्री केदार कश्यप ने इस सफलता पर जशपुर की टीम को बधाई देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में हमारा संकल्प वनवासियों को भारत के विकास का सक्रिय सहभागी बनाना है। जशपुर का यह सफल बिजनेस मॉडल पूरे प्रदेश के लिए रोल मॉडल है, जो छत्तीसगढ़ को वनाधारित अर्थव्यवस्था (Forest-based Economy) के क्षेत्र में देश का नंबर वन राज्य बनाने की ओर अग्रसर है।

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