जगदलपुर/हैदराबाद: केंद्र सरकार द्वारा माओवाद के खात्मे के लिए तय की गई 31 मार्च 2026 की समय-सीमा से पहले सुरक्षा बलों को अब तक की सबसे बड़ी सफलता मिली है। प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) के जनरल सेक्रेटरी और संगठन के मुख्य रणनीतिकार थिप्परी तिरुपति उर्फ देवजी (62) ने आज तेलंगाना पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया है।
सूत्रों के अनुसार, देवजी के साथ 16 अन्य हार्डकोर माओवादियों ने भी हथियार डाले हैं। देवजी पर 1 करोड़ रुपये से अधिक का इनाम घोषित था। वह मई 2025 में मारे गए पूर्व महासचिव नम्बाला केशव राव उर्फ बसवाराजू का उत्तराधिकारी माना जाता था।
क्यों अहम है यह आत्मसमर्पण?
नेतृत्व का अभाव: देवजी न केवल केंद्रीय समिति (CC) का सदस्य था, बल्कि पोलित ब्यूरो का भी हिस्सा था। उसके सरेंडर से संगठन अब पूरी तरह से 'नेतृत्व विहीन' हो गया है।
कर्रेगुट्टा ऑपरेशन का दबाव: पिछले कुछ दिनों से छत्तीसगढ़-तेलंगाना सीमा पर स्थित कर्रेगुट्टा की पहाड़ियों में 2000 जवानों द्वारा चलाए जा रहे 'निर्णायक अभियान' ने शीर्ष नेतृत्व को चारों तरफ से घेर लिया था। रसद और संचार टूटने के कारण देवजी के पास सरेंडर के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था।
संगठन में फूट: पिछले साल रूपेश और भूपति जैसे बड़े कमांडरों के सरेंडर के बाद से ही देवजी गुट दबाव में था। इस आत्मसमर्पण ने निचले कैडर के मनोबल को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है।
कौन है देवजी?
मूल रूप से तेलंगाना के जगतिआल जिले का रहने वाला थिप्परी तिरुपति पिछले चार दशकों से माओवादी आंदोलन का मुख्य चेहरा था। उसने ही माओवादियों की सैन्य विंग PLGA (पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी) को खड़ा किया था और बस्तर के जंगलों में कई घातक हमलों की रणनीति तैयार की थी।

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