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नक्सलियों के सरेंडर से कमजोर हुआ माओवादी संगठन, नक्सल समिति का नया लेटर सामने आया

छत्तीसगढ़ में नक्सलियों का संगठन चरमरा चुका है। राज्य में एक बाद एक होते नक्सल सरेंडरों से माओवादी संगठन बोखला गए हैं। बस्तर में नक्सलियों का एक नया पत्र सामने आया है, जिसमें पोलित ब्यूरो सदस्य सोनू और केंद्रीय समिति सदस्य रूपेश के आत्म समर्पण के बाद माओवादी संगठन ने अपनी प्रतिक्रिया दी है, जिसमें सोनू और रूपेश के आत्मसमर्पण को गद्दारी बताया है। पत्र में लिखा है कि माओवादी संगठन में रहते हुए पोलित ब्यूरो सदस्य सोनू उर्फ वेणुगोपाल लगातार संगठन की आलोचना कर रहे थे और उन्होंने माओवादियों को गुमराह कर समर्पण कराया है

टूट रहा संगठन
बता दें कि सोनू और रूपेश के आत्म समर्पण करने से संगठन में गंभीर संकट खड़ा हो गया है, क्योंकि यह संगठन के बडे़ नाम थे और कई बड़ी घटनाओं में शामिल थे। बताया जाता है कि नक्सल संगठनों को चलाने में इनकी अहम भूमिका थी। ऐसे में माओवादियों की तरफ से जारी हुए पत्र में आत्म समर्पण करने वाले माओवादियों का केंद्रीय समिति ने बहिष्कार करने की बात लिखी है। साथ ही लिखा है कि केंद्रीय समिति प्रवक्ता अभय ने कहा कुछ लोगों के आत्म समर्पण करने से संगठन की हार नहीं होगी, गद्दारों को सजा देने दी जाएगी। लेकिन इस पत्र से यह तय हो गया है कि नक्सलियों की कमजोरी खुलकर सामने आ गई है।
सिकुड़ा नक्सलियों का दायरा
छत्तीसगढ़ में 210 नक्सलियों के सरेंडर के बाद अब बस्तर में नक्सलियों का दायरा सिकुड़ गया है, क्योंकि इतनी बड़ी संख्या में एक साथ सरेंडर और पहले से हो रहे सरेंडर की वजह से अब नक्सली संगठन का पोलित ब्यूरो लगभग खाली हो चुका है। क्योंकि जिस कमेटी में 17 से ज्यादा बड़े सदस्य थे, अब उसमें 8 से भी कम सदस्य बचे हैं। क्योंकि कई बड़े लीडर जैसे बसवराजू,चलपति मारे जा चुके हैं तो भूपति, रूपेश जैसे बड़े नक्सलियों ने सरेंडर कर दिया है। ऐसे में अब नक्सलियों को लेकर फोर्स और भी अलर्ट हो गई है, क्योंकि नक्सली अब हर तरफ से घिरते भी जा रहे हैं।
हिड़मा अब भी चुनौती
बस्तर में सुरक्षाबलों के लिए अब नक्सली हिड़मा ही सबसे बड़ी चुनौती है, क्योंकि सुकमा और बीजापुर जिले ही अब ज्यादा नक्सल प्रभावित हैं, जबकि अब बाकि के जिलों में नक्सली संगठन कमजोर हो चुके हैं। माडवी हिड़मा, रमन्ना, गणेश उइके जैसे सदस्य अब यहां सक्रिए हैं. ऐसे में फोर्स ने घेरा बंदी बढ़ा दी है। क्योंकि आने वाले दिन नक्सल संगठनों को लेकर अहम साबित हो सकते हैं।






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