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ड्रग्स तस्करी पर नकेल: सरकार ने तय की 25 तरह के नशीले पदार्थों की दरें, अब हेराफेरी पर लगेगा लगाम...

नशीले पदार्थों की तस्करी और जब्ती की कार्रवाई में पारदर्शिता लाने के लिए सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए 25 अलग-अलग तरह की ड्रग्स की दरें तय कर दी हैं। अब देश के किसी भी हिस्से में तस्कर पकड़े जाएं, उनके पास से बरामद नशीले पदार्थों की कीमत इसी आधिकारिक रेट लिस्ट के आधार पर आंकी जाएगी। इस पहल का मुख्य उद्देश्य जब्ती के दौरान होने वाली कीमतों की विसंगतियों को दूर करना और कानूनी प्रक्रिया को और अधिक मजबूत बनाना है।

अक्सर देखा जाता था कि अलग-अलग राज्यों या एजेंसियों द्वारा पकड़ी गई ड्रग्स की कीमत में भारी अंतर बताया जाता था। कभी तस्कर कम कीमत बताकर सजा से बचने की कोशिश करते थे, तो कभी रिकॉर्ड में हेरफेर की गुंजाइश बनी रहती थी। अब अफीम, गांजा, चरस, हेरोइन और एमडीएमए जैसे 25 प्रमुख मादक पदार्थों की एक स्टैंडर्ड दर तय होने से जांच एजेंसियों और कोर्ट के लिए मामले की गंभीरता का आकलन करना आसान हो जाएगा।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद अब तस्कर या उनके वकील अदालत में ड्रग्स की कम कीमत बताकर मामले को हल्का नहीं कर पाएंगे। जब्ती की मात्रा और सरकार द्वारा तय की गई दर के आधार पर ही केस की कुल वैल्यू निर्धारित होगी। इससे एनडीपीएस (NDPS) कोर्ट में चल रहे ट्रायल के दौरान सबूतों और बरामदगी की वैल्यू को लेकर होने वाली बहस में स्पष्टता आएगी, जिससे दोषियों को सजा दिलाना अधिक प्रभावी होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से ड्रग सिंडिकेट की कमर टूटेगी। नेशनल हाईवे और बॉर्डर इलाकों में सक्रिय तस्करों के पास से मिलने वाले माल का अब एक 'मार्केट स्टैंडर्ड' होगा। यह दरें केवल बाजार मूल्य को नहीं दर्शातीं, बल्कि यह जांच अधिकारियों के लिए एक बेंचमार्क के रूप में काम करेंगी, ताकि वे ऊपरी स्तर तक तस्करी के नेटवर्क और मनी लॉन्ड्रिंग के लिंक को जोड़ सकें।
सरकार का यह फैसला नशीली दवाओं के खिलाफ जारी जीरो टॉलरेंस की नीति का हिस्सा है। इस रेट लिस्ट को समय-समय पर अपडेट भी किया जाएगा ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजार की हलचल के अनुसार पारदर्शिता बनी रहे। इस बदलाव के बाद अब पुलिस और नारकोटिक्स विभाग के लिए देशभर में एक समान कार्रवाई करना और जब्ती के आंकड़ों को सटीक रखना बहुत आसान हो जाएगा।







