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'हरे सोने' की बहार: 1300 से अधिक केंद्रों पर शुरू होगी तेंदूपत्ता खरीदी, जानिए इस बार आदिवासी परिवारों के लिए क्या है खास?

RRT News- बस्तर के घने जंगलों में फिर एक बार 'हरे सोने' यानी तेंदूपत्ता की चमक बढ़ने वाली है। वनवासियों और आदिवासियों के लिए यह न केवल आजीविका का जरिया है, बल्कि उनकी खुशहाली का सबसे बड़ा आधार भी है। इस साल तेंदूपत्ता सीजन को लेकर बस्तर संभाग में जो हलचल देखी जा रही है, उससे उम्मीदें बहुत ज्यादा हैं। आखिर क्या है इस बार की रणनीति और क्यों हर कोई इस सीजन के शुरू होने का बेसब्री से इंतजार कर रहा है?

प्रशासन ने इस बार तेंदूपत्ता खरीदी को सुगम बनाने के लिए कमर कस ली है। बस्तर संभाग में 1300 से अधिक संग्रहण केंद्रों (फड़ों) को चिन्हित किया गया है। इन केंद्रों के माध्यम से वन विभाग ने पूरी कार्ययोजना तैयार कर ली है ताकि सुदूर अंचलों में रहने वाले ग्रामीणों को अपनी उपज बेचने में कोई परेशानी न हो। तैयारियों का स्तर देख यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस बार खरीदी का लक्ष्य काफी ऊंचा रखा गया है।
इस साल की सबसे बड़ी चर्चा का विषय यह है कि क्या आदिवासियों को उनके मेहनत का सही और समय पर दाम मिल पाएगा? अधिकारियों का दावा है कि इस बार प्रबंधन पर खास ध्यान दिया गया है ताकि बिचौलियों की भूमिका न रहे और सीधे संग्राहकों को लाभ मिले। संग्रहण से लेकर भुगतान तक की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए प्रशासन ने जो खाका तैयार किया है, वह हजारों परिवारों की आर्थिक स्थिति बदलने वाला साबित हो सकता है।
तेंदूपत्ता का सीजन बस्तर की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। यदि यह सीजन सफल रहा, तो हजारों आदिवासी परिवारों के घर में खुशहाली का नया दौर शुरू होगा। क्या वाकई इस बार की खरीदी पुराने सभी रिकॉर्ड तोड़ पाएगी और आदिवासियों को उनकी मेहनत का पूरा हक मिलेगा? आने वाले कुछ ही दिनों में इसकी तस्वीर साफ हो जाएगी, लेकिन फिलहाल तो बस्तर में तैयारी और उम्मीदों का जोर है।







