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तेलंगाना में 'बंदूक' छोड़ 'बैलट' की राह: 4 दशक तक जंगलों में रहे शीर्ष माओवादी नेताओं ने की CM रेवंत रेड्डी से मुलाकात; सियासी एंट्री के संकेत

हैदराबाद: तेलंगाना की राजनीति में उस वक्त एक बड़ा मोड़ आया, जब हाल ही में आत्मसमर्पण करने वाले प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) के कई शीर्ष नेताओं ने शुक्रवार शाम राज्य सचिवालय में मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी से मुलाकात की। इन नेताओं में पोलित ब्यूरो सदस्य तिप्पिरी तिरुपति उर्फ देवजी और केंद्रीय समिति के सदस्य मल्ला राजी रेड्डी उर्फ संग्राम जैसे बड़े नाम शामिल थे। मुख्यमंत्री ने इन पूर्व कैडरों का स्वागत करते हुए उन्हें लोकतांत्रिक रास्ते पर चलने के लिए बधाई दी। रेवंत रेड्डी ने स्पष्ट किया कि हिंसा किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं है और जनता की आकांक्षाएं केवल लोकतांत्रिक माध्यमों से ही पूरी की जा सकती हैं।

मुलाकात के दौरान, 62 वर्षीय देवजी, जो कभी माओवादियों की सेंट्रल मिलिट्री कमीशन (CMC) के प्रमुख थे, ने अपनी भावी योजनाओं को लेकर बड़े संकेत दिए। उन्होंने मीडिया से चर्चा में कहा कि वे अब "कानूनी ढांचे के भीतर" रहकर जनता के अधिकारों के लिए लड़ेंगे। देवजी ने संकेत दिया कि वे जल्द ही सक्रिय राजनीति में प्रवेश कर सकते हैं और दशकों से जिस विचारधारा को मानते आए हैं, उसी के मार्गदर्शन में सार्वजनिक समस्याओं पर संघर्ष जारी रखेंगे। हालांकि, उनके साथी मल्ला राजी रेड्डी (76 वर्ष) ने फिलहाल चुनावी राजनीति में शामिल होने से इनकार किया है, लेकिन उन्होंने भी मुख्यधारा में रहकर समाज सेवा की बात कही है।
राज्य सरकार ने इन पूर्व नेताओं को उचित सुरक्षा और पुनर्वास पैकेज देने का आश्वासन दिया है। डीजीपी बी. शिवधर रेड्डी ने मुख्यमंत्री को जानकारी दी कि पिछले दो वर्षों में राज्य भर में 591 माओवादियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में वापसी की है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन कद्दावर नेताओं का लोकतांत्रिक राजनीति की ओर झुकाव बस्तर और दंडकारण्य जैसे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में माओवादी आंदोलन के लिए एक बड़ा झटका है। यह मुलाकात न केवल पुनर्वास की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि आने वाले समय में तेलंगाना की क्षेत्रीय राजनीति के समीकरण भी बदल सकती है।







