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‘अबूझ’ इलाकों में गूंजी मोबाइल की घंटी: ताहकाडोंड में पहली बार पहुंचा नेटवर्क, अपनों से बात करने के लिए अब नहीं चढ़ना पड़ेगा पहाड़

Chhattisgarh 07 May 2026 (31)

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RRT News- छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग का वह हिस्सा जिसे कभी 'अबूझ' यानी अनजान कहा जाता था, अब डिजिटल युग की मुख्यधारा से जुड़ रहा है। नारायणपुर जिले के ओरछा विकासखंड के सुदूर वनांचल ग्राम ताहकाडोंड में पहली बार मोबाइल टावर की स्थापना की गई है। इस ऐतिहासिक कदम ने दशकों से चले आ रहे संचार के सन्नाटे को हमेशा के लिए खत्म कर दिया है। अब इस नक्सल प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीण अपनों से बात करने के लिए ऊंची पहाड़ियों और दुर्गम रास्तों पर नहीं चढ़ते, बल्कि अपने घर की चौखट पर बैठकर ही दुनिया से जुड़ रहे हैं।

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पहाड़ चढ़ने की मजबूरी हुई खत्म

ताहकाडोंड और उसके आसपास के ग्रामीणों के लिए मोबाइल नेटवर्क का आना किसी उत्सव से कम नहीं है। अब तक यहाँ सिग्नल की तलाश में लोगों को कई किलोमीटर पैदल चलकर पहाड़ों की चोटियों पर जाना पड़ता था, जहाँ बमुश्किल फोन लग पाता था। आपातकालीन स्थिति या स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों के लिए एंबुलेंस बुलाना भी एक बड़ी चुनौती थी। टावर लगने से अब संचार की यह बाधा दूर हो गई है, जिससे ग्रामीणों के जीवन में एक बड़ा और सुखद बदलाव आया है।

विकास की नई इबारत

डिजिटल संकेतों के पहुँचने से केवल बातचीत ही आसान नहीं हुई है, बल्कि इसके दूरगामी परिणाम भी देखने को मिलेंगे:

स्वास्थ्य और शिक्षा: अब ग्रामीण टेली-मेडिसिन और ऑनलाइन शिक्षा जैसे डिजिटल संसाधनों का लाभ उठा सकेंगे।

सरकारी योजनाएं: मोबाइल नेटवर्क होने से बैंकिंग और विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे ग्रामीणों के मोबाइल तक पहुँचेगा।

सुरक्षा व्यवस्था: सुरक्षा बलों और स्थानीय प्रशासन के बीच समन्वय बेहतर होगा, जिससे क्षेत्र में शांति व्यवस्था मजबूत होगी।

प्रशासन के इस प्रयास ने साबित कर दिया है कि बस्तर का वनांचल अब केवल नक्सलवाद की खबरों तक सीमित नहीं है, बल्कि वह विकास की नई गाथा लिख रहा है। ताहकाडोंड में गूंजी मोबाइल की यह घंटी यहाँ के निवासियों के लिए एक सुनहरे भविष्य का संकेत है।

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