Raipur: निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज ने छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान प्रदेश की सांस्कृतिक और धार्मिक जड़ों की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ न केवल प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है, बल्कि यह एक ऐसा राज्य है जहाँ सनातन परंपराओं का पूरी निष्ठा के साथ पालन किया जाता है। स्वामी जी के अनुसार, यहाँ के लोगों की सरलता और धर्म के प्रति अटूट आस्था इसे देश के अन्य राज्यों के बीच एक विशिष्ट धार्मिक पहचान दिलाती है।
स्वामी कैलाशानंद गिरी ने उल्लेख किया कि छत्तीसगढ़ की धरती माता कौशल्या का मायका और भगवान श्रीराम का ननिहाल है, जो इसकी धार्मिक महत्ता को स्वतः ही सिद्ध कर देता है। उन्होंने यहाँ आयोजित होने वाले धार्मिक अनुष्ठानों और मेलों का जिक्र करते हुए कहा कि जिस तरह से यहाँ की जनता अपनी प्राचीन संस्कृति को सहेज कर रख रही है, वह समस्त राष्ट्र के लिए प्रेरणादायक है। उनके प्रवास के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उनके दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त करने पहुँचे।
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने समाज में समरसता और सनातन धर्म के सिद्धांतों के प्रसार पर जोर दिया। उन्होंने विश्वास जताया कि छत्तीसगढ़ आने वाले समय में अध्यात्म और सेवा के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अपनी छाप छोड़ेगा। स्वामी जी ने शासन-प्रशासन द्वारा धार्मिक स्थलों के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में किए जा रहे कार्यों की भी प्रशंसा की, जिससे प्रदेश में पर्यटन के साथ-साथ आध्यात्मिक चेतना का भी विस्तार हो रहा है।








