छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के माडागांव में आयोजित 'सुशासन तिहार' शिविर में उस वक्त भावुक कर देने वाला दृश्य सामने आया, जब एक मां अपनी मासूम बच्ची के अधिकारों के लिए प्रशासन के सामने खड़ी हुई। फुलिमुड़ा गांव की निवासी खुशबू नामक महिला ने अपनी दुधमुंही बच्ची के साथ शिविर में पहुंचकर गुहार लगाई कि उसकी बेटी को पिता का नाम दिलाया जाए। महिला का आरोप है कि उसकी बच्ची के जन्म के बाद से ही उसके पति ने पिता होने की जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है और अब उसे अपनाने से इनकार कर रहा है।
पीड़िता खुशबू ने आवेदन में बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला के अनुसार, उसका पति न केवल बच्ची को स्वीकार करने से मना कर रहा है, बल्कि उसे तलाक देने की धमकी भी दे रहा है। हद तो तब हो गई जब पति ने बच्ची का जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए जरूरी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने और सहयोग करने से मना कर दिया। खुशबू ने बताया कि बच्ची के जन्म के बाद से अब तक उसका पिता एक बार भी उसे देखने तक नहीं पहुंचा है, जिससे मां और बच्ची दोनों का भविष्य अधर में लटका हुआ है।
सुशासन तिहार शिविर में मौजूद अधिकारियों ने महिला की आपबीती सुनी और मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत जांच के निर्देश दिए हैं। प्रशासन ने आश्वस्त किया है कि बच्ची के अधिकारों और महिला को न्याय दिलाने के लिए नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। स्थानीय प्रशासन इस मामले में पति की काउंसलिंग करने और कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से बच्ची को उसका हक दिलाने की दिशा में कदम उठा रहा है। यह मामला शासन के सुशासन दावों के बीच सामाजिक कुरीतियों और पारिवारिक विवादों की एक कड़वी सच्चाई को भी बयां करता है।







