छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले से भाजपा के भीतर गुटबाजी और कलह की एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। एक विकास कार्य के भूमि पूजन कार्यक्रम के दौरान मंत्री और स्थानीय विधायक के समर्थक आपस में भिड़ गए। विवाद उस समय शुरू हुआ जब क्षेत्रीय विधायक के कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने से पहले ही मुख्य अतिथि (मंत्री) ने भूमि पूजन की रस्म पूरी कर दी। इस बात से नाराज विधायक समर्थकों ने मंच पर ही विरोध शुरू कर दिया, जो देखते ही देखते तीखी बहस और धक्का-मुक्की में बदल गया। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
मिली जानकारी के अनुसार, कार्यक्रम के प्रोटोकॉल को लेकर दोनों पक्षों के बीच पहले से ही खींचतान चल रही थी। विधायक पक्ष का आरोप है कि उन्हें जानबूझकर नजरअंदाज किया गया और उनके पहुंचने का इंतजार किए बिना ही शिलापट्ट का अनावरण कर दिया गया। जब विधायक के करीबी नेता और कार्यकर्ता मंच पर पहुंचे, तो उन्होंने व्यवस्था पर सवाल उठाए, जिसके बाद मंत्री समर्थकों ने मोर्चा संभाल लिया। मंच पर मौजूद वरिष्ठ नेताओं के सामने ही कार्यकर्ताओं के बीच जमकर जुबानी जंग हुई, जिससे वहां मौजूद आम जनता और अधिकारी सन्न रह गए।
वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे पार्टी के ही दो गुट एक-दूसरे को नीचा दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। इस हंगामे के चलते काफी देर तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा और पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों को बीच-बचाव करना पड़ा। यह घटना उस समय हुई है जब पार्टी एकजुटता का दावा कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर नेताओं के बीच वर्चस्व की लड़ाई खुलकर सामने आ गई है। विपक्षी दलों ने भी इस वीडियो को लेकर सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया है, इसे 'सत्ता का अहंकार' करार दिया जा रहा है।
इस विवाद ने भाजपा संगठन की मुश्किलों को बढ़ा दिया है। प्रदेश नेतृत्व ने मामले का संज्ञान लेते हुए स्थानीय पदाधिकारियों से रिपोर्ट तलब की है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सूरजपुर जैसी घटनाओं से जनता के बीच गलत संदेश जाता है और इसका असर आने वाले स्थानीय चुनावों पर पड़ सकता है। फिलहाल, दोनों पक्षों की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन पार्टी के भीतर इस अनुशासनहीनता को लेकर कार्रवाई की तलवार लटक रही है।

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