RRT News- रायपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड और नगर निगम की लापरवाही के कारण साइंस कॉलेज मैदान के सामने से विस्थापित हुई 'स्मार्ट चौपाटी' आज बदहाली के आंसू रो रही है। करीब 6 करोड़ रुपये के भारी-भरकम निवेश से तैयार इस प्रोजेक्ट को नवंबर 2025 में आमानाका ब्रिज के नीचे शिफ्ट किया गया था। प्रशासन ने दावा किया था कि नई जगह पर दुकानदारों को आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है। आज 60 से अधिक दुकानें पूरी तरह बंद पड़ी हैं, जिससे करोड़ों की सरकारी संपत्ति धूल फांक रही है।
शिफ्टिंग के वक्त नगर निगम ने सड़क, बिजली, सुचारू लाइट व्यवस्था और पुख्ता सुरक्षा देने का वादा किया था, लेकिन 6 महीने बीत जाने के बाद भी यहां मूलभूत सुविधाओं का नामोनिशान नहीं है। अंधेरे और अव्यवस्था के कारण ग्राहक यहाँ आने से कतरा रहे हैं, जिसके चलते दुकानदारों को अपने शटर गिराने पर मजबूर होना पड़ा है। स्मार्ट सिटी के नाम पर बनाई गई यह चौपाटी अब केवल कागजी दावों तक सीमित रह गई है और रख-रखाव के अभाव में खंडहर में तब्दील हो रही है।
इस प्रशासनिक विफलता का सबसे गहरा असर उन सैकड़ों परिवारों पर पड़ा है, जिनकी आजीविका इन दुकानों पर टिकी थी। विस्थापन के बाद बेहतर भविष्य की उम्मीद लगाए बैठे दुकानदारों के हाथ अब खाली हैं और उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। स्थानीय व्यवसायियों का कहना है कि प्रशासन की अनदेखी ने न केवल जनता के पैसे की बर्बादी की है, बल्कि मेहनत कश लोगों के रोजगार को भी छीन लिया है।








