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मुख्यमंत्री की मौजूदगी में पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय और सीएमडीसी के मध्य हुआ महत्वपूर्ण समझौता

रायपुर, 31 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में करीब 25 साल बाद दोबारा शुरू हुए कोरंडम खनन को अब स्थानीय स्तर पर मूल्य संवर्धन और रोजगार से जोड़ने की तैयारी है। इसी दिशा में छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (CMDC) और पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर के बीच मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मौजूदगी में महत्वपूर्ण समझौता हुआ। इसके तहत विश्वविद्यालय कोरंडम की कटिंग, पॉलिशिंग और जेम्स्टोन हैंडलिंग के आधुनिक प्रशिक्षण में नॉलेज पार्टनर की भूमिका निभाएगा। सरकार का लक्ष्य खनन से लेकर आभूषण निर्माण, ब्रांडिंग और मार्केटिंग तक पूरी वैल्यू चेन छत्तीसगढ़ में विकसित करना है।

बीजापुर के भोपालपट्टनम क्षेत्र के ग्राम कुचनूर में फरवरी 2025 से कोरंडम खदान का दोबारा संचालन किया जा रहा है। यहां वैज्ञानिक पद्धति से उच्च गुणवत्ता वाले कोरंडम का उत्खनन किया जा रहा है। वर्तमान में खदान से निकाले गए कोरंडम का लगभग 240 किलोग्राम भंडारण बताया गया है, जिसमें 157.643 किलोग्राम का परिवहन किया जा चुका है। इसमें 107.989 किलोग्राम बी-ग्रेड और 49.654 किलोग्राम औद्योगिक ग्रेड कोरंडम शामिल है। खदान के संचालन से बीजापुर के 14 स्थानीय युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी मिले हैं।
Corundum Training: युवाओं को मिलेगा आधुनिक कौशल
कोरंडम से अधिक आर्थिक लाभ हासिल करने के लिए केवल खनन तक सीमित रहने के बजाय इसकी कटिंग, पॉलिशिंग और अन्य वैल्यू एडिशन गतिविधियों को स्थानीय स्तर पर बढ़ावा दिया जाएगा। पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के साथ हुए समझौते के जरिए स्थानीय युवाओं और शिल्पकारों को रत्नों की पहचान, जेम्स्टोन हैंडलिंग, कटिंग और पॉलिशिंग जैसी तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे रोजगार के साथ स्थानीय स्तर पर छोटे उद्यम और स्वरोजगार शुरू करने के रास्ते भी खुलेंगे।
Bastar Brand: स्थानीय कोरंडम को मिलेगा नया बाजार
कुचनूर से प्राप्त उच्च गुणवत्ता वाले कोरंडम को ‘बस्तर ब्रांड’ से जोड़ने की योजना है। इसके तहत स्थानीय डिजाइन, गुणवत्ता और प्रमाणिकता के साथ कोरंडम से आभूषण और अन्य रत्न उत्पाद तैयार किए जाएंगे। इन उत्पादों की ब्रांडिंग और मार्केटिंग के जरिए बस्तर की कला, शिल्प और खनिज संपदा को व्यापक बाजार से जोड़ने का प्रयास होगा। स्थानीय शिल्पकारों, स्टार्टअप्स और उद्यमियों की भागीदारी से कोरंडम आधारित नए कारोबार विकसित किए जा सकेंगे।
बीजापुर में कोरंडम के नए संभावित क्षेत्रों की पहचान और अन्वेषण का काम भी जारी है। भोपालपट्टनम क्षेत्र के कुचनूर सहित अन्य इलाकों में खनिज संभावनाओं का आकलन किया जा रहा है। पारदर्शी नीलामी और स्थानीय स्तर पर मूल्य संवर्धन से राज्य को अतिरिक्त राजस्व मिलने के साथ बस्तर के कोरंडम को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान मिलने की संभावना है। सरकार की यह पहल खनन को रोजगार, कौशल विकास और स्थानीय आर्थिक सशक्तिकरण से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।


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