रायपुर: छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) भर्ती घोटाले की जांच में लगातार नए और गंभीर खुलासे सामने आ रहे हैं। केंद्रीय जांच एजेंसी द्वारा पेश की गई चार्जशीट में यह बात उजागर हुई है कि यह घोटाला सिर्फ परीक्षा में गड़बड़ी तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके पीछे एक संगठित वसूली नेटवर्क काम कर रहा था, जो NGOs, कोचिंग संस्थानों और प्रभावशाली लोगों तक फैला हुआ था।
जांच में सामने आया है कि भर्ती प्रक्रिया से जुड़े कुछ अधिकारियों और बिचौलियों ने मिलकर अभ्यर्थियों से मोटी रकम वसूलने की योजना बनाई थी। कोचिंग सेंटरों के माध्यम से उम्मीदवारों को पहले परीक्षा पास कराने का भरोसा दिया गया और फिर प्री व मेंस परीक्षा में मदद के नाम पर लाखों रुपये की मांग की गई।
चार्जशीट के अनुसार, कई अभ्यर्थियों को यह विश्वास दिलाया गया कि उन्हें परीक्षा से पहले विशेष सामग्री और प्रश्नों की जानकारी दी जाएगी। इसी भरोसे के आधार पर उनसे अलग-अलग चरणों में पैसे लिए गए। कुछ मामलों में अभ्यर्थियों और उनके परिजनों से सीधे मुलाकात कर सौदे तय किए गए।
जांच एजेंसी ने यह भी पाया कि वसूली की रकम को वैध दिखाने के लिए NGOs और अन्य संस्थाओं के खातों का इस्तेमाल किया गया। इससे न केवल पैसों का लेन-देन छिपाया गया, बल्कि पूरे नेटवर्क को संगठित तरीके से चलाया गया।
इस घोटाले ने राज्य की भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। युवाओं में नाराजगी है और निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली की मांग तेज हो गई है। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि मामले में दोषी पाए जाने वाले हर व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल मामला न्यायालय में विचाराधीन है और जांच आगे बढ़ने के साथ और भी बड़े खुलासों की संभावना जताई जा रही है।








