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246 आवासों के लिए सरकारी जमीन के रिकॉर्ड में हेराफेरी, तत्कालीन पटवारी और जनप्रतिनिधि घिरे

RRT News Sakti: छत्तीसगढ़ के नवनिर्मित सक्ती जिले (तत्कालीन जांजगीर-चांपा जिला) के बाराद्वार नगर पंचायत क्षेत्र से 'प्रधानमंत्री आवास योजना' (PM Awas Yojana) में एक बेहद गंभीर और बड़े फर्जीवाड़े का मामला प्रकाश में आया है। बाराद्वार नगर पंचायत में स्वीकृत हुए आवासों को लेकर चल रहा विवाद अब एक बड़े प्रशासनिक और राजनीतिक घोटाले का रूप लेता जा रहा है। आरोप है कि कुल 246 आवासों को नियम-विरुद्ध तरीके से लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से शासकीय (सरकारी) भूमि के राजस्व रिकॉर्ड और दस्तावेजों में बड़े पैमाने पर कथित तौर पर हेराफेरी और कूटरचना की गई है। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद नगर पंचायत के कतिपय रसूखदार जनप्रतिनिधि और तत्कालीन हल्का पटवारी सीधे तौर पर सवालों के घेरे में आ गए हैं।

इस पूरे मामले का पटाक्षेप तब हुआ जब सजग नागरिकों और पीड़ितों द्वारा कलेक्ट्रेट और जिला प्रशासन के समक्ष इस गंभीर वित्तीय व प्रशासनिक अनियमितता की लिखित शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत में बिंदुवार बताया गया है कि किस तरह अपात्र लोगों को फायदा पहुंचाने और सरकारी जमीन को खुर्द-बुर्द करने के लिए नगर पंचायत के कुछ रसूखदारों ने तत्कालीन पटवारी के साथ साठगांठ की। राजस्व विभाग के शासकीय अभिलेखों में दर्ज सरकारी जमीनों के खसरा नंबरों को कथित रूप से बदलकर या उनमें कांट-छांट कर, उन पर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान स्वीकृत करा दिए गए, जो कि सीधे तौर पर नियमों का खुला उल्लंघन और शासकीय धन का दुरुपयोग है।
मामले की गंभीरता और बढ़ते जन-आक्रोश को देखते हुए सक्ती जिला प्रशासन ने त्वरित कदम उठाते हुए एक उच्च स्तरीय जांच टीम (Inquiry Committee) का गठन कर दिया है। यह विशेष जांच टीम वर्तमान में बाराद्वार नगर पंचायत और संबंधित हल्का के सभी संदेहास्पद दस्तावेजों, जमीन से जुड़े प्राचीन व वर्तमान अभिलेखों, बी-1 और खसरा पांचाला की बारीकी से जांच-पड़ताल कर रही है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि प्राथमिक जांच में रिकॉर्ड्स के साथ छेड़छाड़ की बू आ रही है। जांच टीम की अंतिम रिपोर्ट आते ही दोषी जनप्रतिनिधियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और तत्कालीन पटवारी सहित संलिप्त कर्मचारियों के खिलाफ निलंबन व एफआईआर (FIR) दर्ज कराने की सख्त अनुशंसा की जाएगी। इस कार्रवाई से पूरे जिले के राजस्व अमले और नगर पंचायत प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है।







