छत्तीसगढ़ शासन के भौमिकी एवं खनिकर्म विभाग के सचिव श्री पी. दयानंद ने रायपुर में आयोजित एक महत्वपूर्ण पत्रकार वार्ता को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने राज्य के खनिज संसाधनों के उचित दोहन और विभाग की भविष्य की कार्ययोजनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार खनिज संपदा के माध्यम से अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देने की दिशा में निरंतर काम कर रही है।
सचिव श्री दयानंद ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में इस वर्ष खनिज राजस्व संग्रहण में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विभाग द्वारा लागू किए गए नए नियमों और डिजिटल निगरानी प्रणाली के कारण अवैध खनन पर लगाम लगी है। राजस्व में हुई इस बढ़ोतरी का उपयोग राज्य के विकास कार्यों और विशेषकर खनन प्रभावित क्षेत्रों (डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन - DMF) के उत्थान के लिए किया जाएगा।
पारदर्शिता के मुद्दे पर बात करते हुए सचिव ने कहा कि अब विभाग पूरी तरह से ऑनलाइन प्रक्रिया की ओर बढ़ रहा है। ई-ऑक्शन (ई-नीलामी) के माध्यम से खनिज ब्लॉकों का आवंटन किया जा रहा है, जिससे न केवल प्रक्रिया में तेजी आई है, बल्कि भ्रष्टाचार की गुंजाइश भी समाप्त हो गई है। उन्होंने बताया कि लौह अयस्क, कोयला और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों के नए ब्लॉकों की पहचान की गई है, जिन्हें जल्द ही नीलामी के लिए रखा जाएगा।
प्रेस वार्ता के दौरान श्री पी. दयानंद ने पर्यावरण संरक्षण और सस्टेनेबल माइनिंग (सतत खनन) पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि खनन गतिविधियों के साथ-साथ पर्यावरण संतुलन बनाए रखना विभाग की प्राथमिकता है। इसके लिए माइनिंग कंपनियों को आधुनिक तकनीक अपनाने और पौधारोपण जैसे अनिवार्य मानकों का पालन करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं। नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अंत में, सचिव ने मीडिया से संवाद करते हुए विभाग की आगामी चुनौतियों और संभावनाओं पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ देश के खनिज मानचित्र पर एक प्रमुख राज्य है और हमारा लक्ष्य खनिज उत्पादन में शीर्ष पर बने रहना है। उन्होंने जनता को आश्वस्त किया कि खनिज संपदा से होने वाली आय का सीधा लाभ राज्य के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है।








