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रूस का 'कयामत वाला हथियार': पोसीडॉन टॉरपीडो, जो समुद्र के नीचे से मचा सकता है तबाही, मिनटों में नक्शे से मिट जाएंगे कई शहर...

वैश्विक भू-राजनीति में बढ़ते तनाव के बीच रूस के 'कयामत के हथियार' (Doomsday Weapon) के नाम से कुख्यात 'पोसीडॉन' ने दुनिया भर के सैन्य विशेषज्ञों की नींद उड़ा दी है। यह केवल एक मिसाइल या टॉरपीडो नहीं है, बल्कि एक इंटरकॉन्टिनेंटल न्यूक्लियर पावर्ड ऑटोनॉमस टॉरपीडो है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन द्वारा घोषित छह 'सुपर वेपन्स' में से एक, पोसीडॉन को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह समुद्र की गहराइयों में चुपचाप हजारों मील का सफर तय कर सकता है और दुश्मन के तटीय शहरों को मिनटों में जमींदोज कर सकता है।

पोसीडॉन की सबसे डरावनी खासियत इसकी 'रेडियोधर्मी सुनामी' (Radioactive Tsunami) पैदा करने की क्षमता है। जब यह परमाणु टॉरपीडो किसी तटीय शहर के करीब समुद्र के भीतर फटता है, तो यह सैकड़ों फीट ऊंची लहरें पैदा करता है जो न केवल विनाशकारी होती हैं, बल्कि अत्यधिक रेडियोधर्मी भी होती हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस हथियार के हमले के बाद प्रभावित इलाका दशकों तक इंसानी बसावट के लायक नहीं रहेगा। इसकी मारक क्षमता इतनी अधिक है कि यह एक झटके में न्यूयॉर्क या लंदन जैसे महानगरों को इतिहास का हिस्सा बना सकता है।
तकनीकी रूप से पोसीडॉन एक 'अदृश्य' हथियार है। यह समुद्र के नीचे लगभग 1,000 मीटर (3,300 फीट) की गहराई पर चल सकता है, जहाँ दुनिया का कोई भी मौजूदा सोनार या डिफेंस सिस्टम इसे ट्रैक करने में सक्षम नहीं है। इसकी रफ्तार और परमाणु ऊर्जा से चलने वाला इंजन इसे असीमित रेंज प्रदान करता है। रूस ने हाल ही में अपनी विशेष परमाणु पनडुब्बी 'बेलगोरोद' (Belgorod) पर इन टॉरपीडो की तैनाती शुरू की है, जो इसे और भी घातक बना देती है। अमेरिकी रक्षा विभाग 'पेंटागन' ने भी इसे एक ऐसी चुनौती माना है जिसका वर्तमान में कोई तोड़ नहीं है।
इस हथियार का अस्तित्व वैश्विक परमाणु शक्ति संतुलन को पूरी तरह बदल देता है। जहां पारंपरिक मिसाइलों को 'मिसाइल डिफेंस सिस्टम' से रोका जा सकता है, वहीं समुद्र के भीतर चलने वाले पोसीडॉन के खिलाफ कोई भी सुरक्षा कवच प्रभावी नहीं है। रूस का दावा है कि यह हथियार केवल 'जवाबी हमले' (Retaliation) के लिए है, लेकिन युद्ध की स्थिति में इसकी मौजूदगी ही शत्रु देशों को पीछे हटने पर मजबूर कर देती है। फिलहाल, पोसीडॉन को रूस की 'थर्ड स्ट्राइक' क्षमता का हिस्सा माना जा रहा है, जो किसी भी बड़े युद्ध के अंत का कारण बन सकता है।







