बिलासपुर जिले के सुप्रसिद्ध धार्मिक स्थल रतनपुर स्थित महामाया मंदिर परिसर में उस समय हड़कंप मच गया, जब मंदिर के ऐतिहासिक कुंड में चार और कछुओं के शव पानी की सतह पर तैरते पाए गए। कछुओं की इस तरह बार-बार हो रही संदिग्ध मौत ने मंदिर प्रबंधन और जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
लगातार हो रही मौतें: संक्रमण या कुछ और?
यह पहली बार नहीं है जब इस पवित्र कुंड में कछुओं की मौत हुई हो। पिछले कुछ समय से रह-रहकर कछुओं के मरने की खबरें आ रही हैं। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं का आरोप है कि कुंड के पानी की साफ-सफाई पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
प्रदूषित जल: श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई जाने वाली पूजन सामग्री और खाने-पीने की चीजों के पानी में सड़ने से जल जहरीला हो सकता है।
संक्रमण की आशंका: विशेषज्ञों का मानना है कि कुंड में किसी तरह का फंगल इंफेक्शन या बीमारी फैल रही है, जो इन संरक्षित जीवों के लिए काल बन रही है।
ऑक्सीजन की कमी: जलकुंभी और गंदगी के कारण पानी में ऑक्सीजन का स्तर कम होने की भी आशंका जताई जा रही है।
वन विभाग और प्रशासन की भूमिका पर सवाल
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम और स्थानीय पुलिस मौके पर पहुँची। विभाग ने कछुओं के शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। जीव प्रेमियों का कहना है कि प्रशासन केवल मौत के बाद औपचारिकता निभाता है, जबकि इन कछुओं को बचाने के लिए ठोस कार्ययोजना की कमी है। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत कछुए संरक्षित श्रेणी में आते हैं, ऐसे में इनकी सुरक्षा करना अनिवार्य है।
श्रद्धालुओं में भारी आक्रोश
महामाया मंदिर आने वाले भक्तों की इस कुंड और इसमें रहने वाले कछुओं से गहरी आस्था जुड़ी है। श्रद्धालु इन्हें 'प्रसाद' खिलाना शुभ मानते हैं। बार-बार हो रही इन मौतों से भक्तों की भावनाएं आहत हो रही हैं। मंदिर ट्रस्ट और जिला प्रशासन से मांग की जा रही है कि तत्काल कुंड के पानी की लैब टेस्टिंग कराई जाए और कछुओं के संरक्षण के लिए विशेषज्ञों की सलाह ली जाए।








