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Big Breaking: 36 साल बाद 'लाल आतंक' का सरेंडर! राजनांदगांव रेंज हुआ पूर्णतः माओवाद मुक्त, अंतिम 5 लड़ाकों के हथियार डालने से रचा गया इतिहास

Chhattisgarh 26 March 2026 (44)

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Rajnandgaon Naxal Free: छत्तीसगढ़ के बस्तर के बाद सबसे संवेदनशील माने जाने वाले राजनांदगांव रेंज से एक ऐसी खबर आई है, जिसने पूरे देश का ध्यान खींचा है। पिछले 36 वर्षों से 'लाल आतंक' के साये में जी रहे इस इलाके को अब आधिकारिक तौर पर 'माओवाद मुक्त' घोषित कर दिया गया है। राजनांदगांव रेंज के अंतर्गत आने वाले आरकेबी (RKB - Rajnandgaon-Kanker-Bastar) डिवीजन के अंतिम 5 सक्रिय माओवादी लड़ाकों ने सुरक्षा बलों के सामने अपने हथियार डाल दिए हैं। यह सफलता केवल पुलिस की नहीं, बल्कि उन हजारों ग्रामीणों की जीत है जिन्होंने दशकों तक हिंसा और डर का सामना किया।

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राजनांदगांव रेंज (जिसमें मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी और खैरागढ़ जैसे जिले शामिल हैं) कभी नक्सलियों का सुरक्षित गलियारा माना जाता था। यहाँ के घने जंगलों और पहाड़ों का फायदा उठाकर माओवादी अपनी समानांतर सरकार चलाते थे। लेकिन सुरक्षा बलों के निरंतर 'नॉकआउट' ऑपरेशंस और सरकार की 'पुनर्वास नीति' ने नक्सलियों की कमर तोड़ दी। सरेंडर करने वाले इन 5 लड़ाकों ने स्वीकार किया कि अब संगठन में न तो विचारधारा बची है और न ही स्थानीय समर्थन। रेंज आईजी और स्थानीय पुलिस प्रशासन की सूझबूझ से बिना एक भी गोली चले इस आतंक का अंत सुनिश्चित किया गया।

इस ऐतिहासिक मोड़ के बाद अब राजनांदगांव और आसपास के सीमावर्ती क्षेत्रों में विकास की नई इबारत लिखी जाएगी। दशकों से बंद पड़े स्कूल, अस्पताल और सड़कें अब फिर से बहाल होंगी। पुलिस महानिदेशक (DGP) ने इस उपलब्धि को छत्तीसगढ़ के इतिहास का स्वर्णिम दिन बताया है। आरकेबी डिवीजन का खात्मा होने से महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश की सीमाओं पर होने वाली नक्सली घुसपैठ पर भी लगाम लगेगी। अब यह क्षेत्र 'लाल गलियारे' की पहचान छोड़, शांति और प्रगति के पथ पर आगे बढ़ने को तैयार है।

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