CG News: छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले से मानवता को शर्मसार करने वाला एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। यहाँ के एक निजी अस्पताल में डॉक्टरों और प्रबंधन ने मिलकर एक नाबालिग लड़की का प्रसव (डिलीवरी) कराया और उसके बाद पैदा हुए नवजात बच्चे को सौदागरों के हाथों बेच दिया। इस घृणित कृत्य का खुलासा तब हुआ जब पीड़ित पक्ष की ओर से शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस की जांच में पता चला कि यह एक संगठित गिरोह था जो मजबूरी का फायदा उठाकर बच्चों की खरीद-फरोख्त का काला कारोबार कर रहा था।
पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए अब तक अस्पताल संचालक, डॉक्टरों और दलालों समेत कुल 10 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। जांच में यह सनसनीखेज तथ्य सामने आया है कि नाबालिग के गर्भवती होने की बात को छिपाकर अवैध रूप से प्रसव कराया गया और फिर मोटी रकम के बदले बच्चे का सौदा कर दिया गया। पकड़े गए आरोपियों में अस्पताल का स्टाफ भी शामिल है, जिन्होंने कागजी दस्तावेजों में हेरफेर कर इस पूरी वारदात को अंजाम देने की कोशिश की थी।
इस हाई-प्रोफाइल मामले का मास्टरमाइंड अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है, जिसकी तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है। पुलिस अधीक्षक ने फरार मुख्य आरोपी की सूचना देने वाले के लिए 5000 रुपये के इनाम की घोषणा की है। बताया जा रहा है कि यह गिरोह लंबे समय से इस तरह की गतिविधियों में लिप्त हो सकता है और इसके तार अन्य जिलों से भी जुड़े होने की आशंका है। पुलिस अब उन खरीदारों का भी पता लगा रही है जिन्होंने इस मासूम को खरीदा था।
इस घटना ने स्वास्थ्य विभाग और निजी अस्पतालों की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय प्रशासन ने संबंधित अस्पताल को सील करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और दोषियों के खिलाफ मानव तस्करी (Human Trafficking) और पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) की गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। राजनांदगांव की इस घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है, जहाँ 'जीवनदाता' कहे जाने वाले डॉक्टरों ने ही चंद रुपयों के लिए मासूम का सौदा कर डाला।








