राजनांदगांव शहर के शिक्षक नगर निवासी 21 वर्षीय युवक अमित भौमिक ने बीते 27 दिसंबर को आत्महत्या कर ली थी। मौत से पहले अमित ने अपनी बहन मुनमुन पोरिया को व्हाट्सएप पर एक भावुक सुसाइड नोट भेजा था, जिसमें उसने अपनी प्रताड़ना की पूरी कहानी बयां की थी। अमित ने नोट में स्पष्ट किया था कि वह किन परिस्थितियों के कारण यह आत्मघाती कदम उठा रहा है और दोषियों को सजा दिलाने की गुहार लगाई थी।
परिजनों ने लगाया गंभीर आरोप
घटना के कई दिन बीत जाने के बाद भी आरोपियों की गिरफ्तारी न होने पर परिजनों का सब्र टूट गया। आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मृतक की बहन मुनमुन पोरिया ने चिखली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि अमित को एक युवती और उसके दूसरे साथी आमीन कुरैशी (निवासी लखोली) द्वारा लंबे समय से मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। परिजनों का दावा है कि इन दोनों ने ही अमित को आत्महत्या के लिए उकसाया और मजबूर किया।
राजनीतिक दबाव की आशंका
मुनमुन पोरिया ने आरोप लगाया कि पुलिस के पास मोबाइल ऑडियो रिकॉर्डिंग और सुसाइड नोट जैसे पुख्ता सबूत मौजूद हैं, फिर भी कार्रवाई नहीं की जा रही है। उन्होंने अंदेशा जताया कि आरोपी आमीन कुरैशी के एक भाजपा नेता का पुत्र होने के कारण उसे राजनीतिक संरक्षण मिल रहा है। परिजनों का कहना है कि सत्ता के दबाव में पुलिस निष्पक्ष जांच करने और आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजने से कतरा रही है।
न्याय के लिए दर-दर भटक रहा परिवार
अमित के परिवार ने बताया कि वे इस मामले की शिकायत एसपी और आईजी से भी कर चुके हैं, लेकिन अब तक उन्हें केवल आश्वासन ही मिला है। "सबूत देने के बाद भी पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी है," यह कहते हुए मृतक की बहन ने प्रशासन से निष्पक्ष न्याय की मांग की है। परिवार ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।








