राजधानी रायपुर को विशाखापट्टनम से जोड़ने वाले नए इकोनॉमिक कॉरिडोर (NH-130CD) पर विकास के साथ-साथ पर्यावरण संतुलन का एक शानदार उदाहरण देखने को मिल रहा है। इस एक्सप्रेसवे का एक बड़ा हिस्सा छत्तीसगढ़ के घने जंगलों और उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व से होकर गुजरता है। वन्यजीवों को तेज रफ्तार वाहनों की चपेट में आने से बचाने के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने यहाँ विशेष 'एनिमल अंडरपास' तैयार किए हैं।
क्या है एनिमल अंडरपास की खासियत?
ये केवल साधारण पुलिया या रास्ते नहीं हैं, बल्कि इन्हें विशेष रूप से जानवरों की प्रकृति को ध्यान में रखकर बनाया गया है:
प्राकृतिक वातावरण: अंडरपास के अंदर और आसपास के हिस्से को इस तरह विकसित किया गया है कि जानवरों को वह जंगल का ही हिस्सा लगे। यहाँ स्थानीय पौधे लगाए गए हैं।
शोर और रोशनी से बचाव: सड़क की ऊंचाई और बनावट ऐसी रखी गई है कि वाहनों की तेज लाइट और शोर नीचे से गुजरने वाले जानवरों को विचलित न करे।
विशाल आकार: इन अंडरपास की चौड़ाई और ऊंचाई पर्याप्त रखी गई है ताकि हाथी जैसे बड़े जानवर भी आसानी से पार हो सकें।
उदंती-सीतानदी कॉरिडोर को मिलेगी मजबूती
उदंती-सीतानदी का इलाका हाथियों, तेंदुओं, भालू और अन्य दुर्लभ वन्यजीवों का प्रमुख गलियारा (Corridor) है। पहले जब घने जंगलों के बीच से सड़कें गुजरती थीं, तो अक्सर सड़क हादसों में वन्यजीवों की मौत हो जाती थी। इन 'स्पेशल अंडरपास' के बन जाने से अब जानवरों का प्रवास सुरक्षित होगा और मानव-वन्यजीव संघर्ष (Human-Wildlife Conflict) में भी कमी आएगी।
ग्रीन हाईवे की ओर बढ़ते कदम
रायपुर-विशाखापट्टनम मार्ग को एक 'ग्रीन हाईवे' के रूप में विकसित किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, पूरे प्रोजेक्ट में ऐसे कई छोटे-बड़े अंडरपास और ओवरपास बनाए जा रहे हैं। यह न केवल छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश के बीच की दूरी को कम करेगा, बल्कि पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) को नुकसान पहुँचाए बिना परिवहन को सुगम बनाएगा।
वन विभाग और NHAI की संयुक्त पहल
इस परियोजना की सफलता में वन विभाग और NHAI के बीच का समन्वय महत्वपूर्ण रहा है। विशेषज्ञों की सलाह पर ही उन जगहों का चयन किया गया जहाँ से जानवरों की आवाजाही सबसे अधिक होती है। सीसीटीवी कैमरों के जरिए इन रास्तों की निगरानी भी की जाएगी ताकि यह देखा जा सके कि जानवर इनका उपयोग किस तरह कर रहे हैं।







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