छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के जिला कोषालय (Treasury) से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ी चूक और अनियमितता के गंभीर आरोप लगे हैं। मिली जानकारी के अनुसार, कोषालय में पदस्थ कंप्यूटर ऑपरेटरों द्वारा उन कार्यों को संपादित किया जा रहा है, जो केवल राजपत्रित अधिकारियों (Gazetted Officers) के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। नियमों के विरुद्ध जाकर ऑपरेटरों को पासवर्ड और डिजिटल सिग्नेचर तक की एक्सेस दिए जाने की बात कही जा रही है, जिससे सरकारी धन के दुरुपयोग का खतरा बढ़ गया है।
इस व्यवस्थागत गड़बड़ी के कारण अब आम जनता और रिटायर्ड कर्मचारियों में अपनी जमा पूंजी और पेंशन को लेकर भय का माहौल है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तकनीकी रूप से अकुशल या अनधिकृत व्यक्ति वित्तीय लेन-देन और वेतन निर्धारण जैसे संवेदनशील काम करेंगे, तो भारी वित्तीय त्रुटियाँ हो सकती हैं। यह न केवल राज्य के खजाने के लिए नुकसानदेह है, बल्कि हजारों पेंशनभोगियों के खातों में होने वाली कटौती या देरी का कारण भी बन सकता है।
कोषालय के भीतर चल रहे इस 'ऑपरेटर राज' को लेकर विभागीय गलियारों में भी चर्चाएं तेज हैं। आरोप है कि वरिष्ठ अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ते हुए आईडी और पासवर्ड ऑपरेटरों के हवाले कर देते हैं। इस लापरवाही से डेटा चोरी और गलत भुगतान (Wrong Payment) की आशंका प्रबल हो गई है। जागरूक नागरिकों और कर्मचारी संगठनों ने इस मुद्दे पर चिंता जताते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है ताकि वित्तीय अनुशासन को बहाल किया जा सके।
मामला सुर्खियों में आने के बाद, अब वित्त विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। क्या शासन को इन अनियमितताओं की भनक नहीं थी? प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि कोषालय के कामकाज की समीक्षा की जाएगी और यदि कोई भी अनधिकृत हस्तक्षेप पाया गया, तो संबंधित अधिकारियों और ऑपरेटरों पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई होगी। फिलहाल, पेंशनर्स और सरकारी कर्मचारी अपनी गाढ़ी कमाई की सुरक्षा को लेकर सरकार के अगले कदम का इंतजार कर रहे हैं।

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