रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर को 'स्मार्ट सिटी' बनाने का दावा करने वाले प्रशासन की पोल अब भाटागांव क्षेत्र में खुलती नजर आ रही है। भाटागांव के मुख्य मार्ग से लेकर भीतरी बस्तियों तक की स्थिति इतनी बदतर हो चुकी है कि यहाँ के निवासी इसे 'नर्क' की संज्ञा दे रहे हैं। टूटी सड़कें, हर तरफ उड़ती धूल और जानलेवा गड्ढों ने आम जनता का जीना मुहाल कर दिया है।
धूल के गुबार और बीमारियों का खतरा
भाटागांव के इस पूरे इलाके में सड़क निर्माण के अधूरे कार्यों और सड़कों के उखड़ने के कारण दिन भर धूल का गुबार छाया रहता है। स्थानीय रहवासियों का कहना है कि धूल की वजह से घरों की खिड़कियां खोलना मुश्किल हो गया है। सबसे बुरा असर बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है, जो लगातार सांस की बीमारियों और आंखों में जलन की समस्या से जूझ रहे हैं।
हादसों को दावत देते गड्ढे
सड़क पर बने बड़े-बड़े गड्ढे आए दिन सड़क हादसों का कारण बन रहे हैं। खासकर दोपहिया वाहन चालक इन गड्ढों में गिरकर घायल हो रहे हैं। बारिश के दिनों में यह स्थिति और भी भयावह हो जाती है जब गड्ढों में पानी भर जाने से उनकी गहराई का अंदाजा नहीं लग पाता। स्मार्ट सिटी के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च करने वाले विभाग आखिर इस महत्वपूर्ण क्षेत्र की अनदेखी क्यों कर रहे हैं, यह बड़ा सवाल है।
जनता का आक्रोश
क्षेत्र की जनता में स्थानीय जनप्रतिनिधियों और नगर निगम प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश है। नागरिकों का आरोप है कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे किए गए थे, लेकिन जमीनी हकीकत आज भी वही है। सड़कों की मरम्मत के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जाती है, जो कुछ ही दिनों में फिर से उखड़ जाती है। स्थानीय व्यापारियों का व्यापार भी धूल और खराब रास्तों की वजह से प्रभावित हो रहा है।
प्रशासन की इस उदासीनता ने रायपुर के 'स्मार्ट सिटी' होने के टैग पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है। भाटागांव के लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सड़कों की मरम्मत और धूल से निजात दिलाने के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए, तो वे उग्र आंदोलन को बाध्य होंगे।








