Raipur: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में धान खरीदी के दौरान एक बड़ा भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। रायपुर के एक धान खरीदी केंद्र में समिति प्रभारी द्वारा सरकारी खजाने को करीब 7 लाख रुपये का चूना लगाने का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। जांच में पाया गया कि समिति प्रभारी ने वास्तविक स्टॉक और रिकॉर्ड बुक में भारी हेराफेरी की थी। इस घोटाले का पर्दाफाश तब हुआ जब भौतिक सत्यापन (Physical Verification) के दौरान मौके पर मौजूद धान की बोरियों और डिजिटल पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों में जमीन-आसमान का अंतर मिला।
मामले की विस्तृत जांच में यह चौंकाने वाली बात सामने आई कि समिति प्रभारी ने भौतिक रूप से उपलब्ध केवल 104 बोरी धान को सरकारी रिकॉर्ड में 850 बोरी दर्शाया था। यानी करीब 746 बोरियों का अंतर पाया गया, जिसका कोई हिसाब-किताब समिति के पास नहीं था। इस फर्जी एंट्री के जरिए सरकार से लाखों रुपये के भुगतान की साजिश रची गई थी। प्रशासन की सतर्कता से इस घोटाले को समय रहते पकड़ लिया गया, वरना सरकारी पैसे का बंदरबांट होना तय था।
प्रशासनिक अधिकारियों की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी समिति प्रभारी के खिलाफ धोखाधड़ी और गबन की विभिन्न धाराओं के तहत FIR दर्ज कर ली है। विभाग ने आरोपी को तत्काल प्रभाव से पद से हटाते हुए विभागीय जांच भी शुरू कर दी है। कलेक्टर ने सख्त निर्देश दिए हैं कि जिले के सभी खरीदी केंद्रों की रैंडम चेकिंग की जाए ताकि किसी अन्य स्थान पर इस तरह की गड़बड़ी न हो सके। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या इस घोटाले में कुछ अन्य कर्मचारी या बिचौलिए भी शामिल थे।
धान खरीदी छत्तीसगढ़ सरकार की सबसे महत्वपूर्ण योजनाओं में से एक है, जिसमें किसानों को सीधा लाभ पहुंचाया जाता है। ऐसे में समिति स्तर पर हो रही इस तरह की धांधली ने सिस्टम की खामियों को उजागर कर दिया है। किसान संगठनों ने भी इस घटना पर कड़ा रोष व्यक्त करते हुए दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग की है। फिलहाल, पुलिस आरोपी की तलाश में जुटी है और जब्त दस्तावेजों के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह खेल कितने समय से चल रहा था।







_m.webp)
