Breaking
- Cultural News: लोकरंग पर्व में बिखरे छत्तीसगढ़ी संस्कृति के रंग, भरथरी और पंड...
- कबीर नगर में गूंजा तीजा-पोरा तिहार, मुख्यमंत्री साय ने सर्व समाज भवन के लिए 5...
- Timber Smuggling News: नदी के बहाव से ओडिशा भेज रहे थे सागौन के लट्ठे, संयुक्...
- Road Accident News: NH-130 पर ट्रैक्टर की टक्कर से बाइक सवार दो युवकों की मौत...
- फोन पर बेटी को परेशान करने से रोका तो भड़का युवक, टांगी से वार कर प्रेमिका की...
- Crime News: ट्रैक्टर चलाने के बहाने युवक को ले गए, तालाब किनारे लहूलुहान मिला...
- Farmer Success: मछली पालन, मुर्गी पालन और बागवानी से युवा किसान ने बदली खेती ...
- Education News: ‘द्रोणाचार्य संगम-2026’ में शिक्षकों का सम्मान, राज्यपाल रमेन...
- बहतराई स्टेडियम में दिखा तीजा तिहार का रंग, मुख्यमंत्री साय ने बहनों संग मनाय...
- Bilaspur Sports News: 845 खिलाड़ियों ने दिखाया दमखम, 3800 अंकों के साथ बिलासप...
Cultural News: लोकरंग पर्व में बिखरे छत्तीसगढ़ी संस्कृति के रंग, भरथरी और पंडवानी ने बांधा समां

रायपुर, 6 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति, लोकगायन और लोकनृत्यों की विविध परंपराओं को मंच देने के उद्देश्य से तीन दिवसीय ‘लोकरंग पर्व’ का भव्य शुभारंभ रायपुर के महंत घासीदास संग्रहालय परिसर स्थित मुक्ताकाशी मंच पर हुआ। 6 से 8 सितंबर तक चलने वाले इस आयोजन में प्रदेश की पारंपरिक लोकविधाओं की रंगारंग प्रस्तुतियां देखने को मिल रही हैं।

आयोजन के पहले दिन भरथरी गाथा, पंडवानी और देवार गीत जैसी लोकविधाओं ने दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित किया। कलाकारों की प्रस्तुतियों में छत्तीसगढ़ के लोकजीवन, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत की झलक दिखाई दी।
भरथरी गाथा से हुई शुरुआत, लोकधुनों ने बांधा समां
लोकरंग पर्व के पहले दिन कार्यक्रम की शुरुआत भरथरी गाथा की प्रस्तुति से हुई। इसके बाद पंडवानी और देवार गीत सहित विभिन्न लोककलाओं की प्रस्तुतियां हुईं। कलाकारों ने अपनी गायन शैली और पारंपरिक प्रस्तुति के माध्यम से छत्तीसगढ़ की लोकपरंपराओं को जीवंत कर दिया।
आयोजन में भरथरी गाथा, देवार गीत, करमा, सरहुल, लोरिक-चंदा, ददरिया, पंडवानी और पंथी जैसी लोकविधाओं को मंच दिया जा रहा है। इससे दर्शकों को प्रदेश की अलग-अलग सांस्कृतिक परंपराओं को एक ही मंच पर देखने का अवसर मिल रहा है।
लोककलाओं की विविधता बनी आकर्षण का केंद्र
पहले दिन दुर्गा साहू ने पंडवानी, पूनम तिवारी ने देवार गीत और अरुणिमा शर्मा ने भरथरी गाथा की प्रस्तुति दी। प्रस्तुतियों में लोकजीवन की संवेदना, सामाजिक परंपराएं और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान नजर आई।
लोकरंग पर्व में लोकगीत और लोकगाथाओं के साथ पारंपरिक लोकनृत्यों को भी प्रमुखता दी जा रही है। इससे आयोजन में छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विविधता का व्यापक रूप देखने को मिल रहा है।
नई पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ने पर जोर
संस्कृति एवं पुरातत्व संचालक डॉ. संजय कन्नौजे ने कहा कि स्थानीय कलाकारों को मंच उपलब्ध कराने से उन्हें अपनी कला प्रस्तुत करने और आगे बढ़ने का अवसर मिलता है। ऐसे आयोजन छत्तीसगढ़ की लोकपरंपराओं को जन-जन तक पहुंचाने के साथ युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने कहा कि लोककलाएं केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं हैं। इनमें प्रदेश के इतिहास, सामाजिक जीवन, लोकविश्वास और सामुदायिक परंपराओं की झलक मिलती है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से इन परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
8 सितंबर तक जारी रहेगा सांस्कृतिक उत्सव
तीन दिवसीय लोकरंग पर्व 8 सितंबर तक जारी रहेगा। आगामी दिनों में भी प्रदेश की विभिन्न लोकविधाओं से जुड़े कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे। आयोजन के माध्यम से रायपुरवासियों को लोकसंगीत, लोकगाथाओं, लोकनृत्यों और पारंपरिक कलाओं को करीब से देखने-सुनने का अवसर मिल रहा है।
कार्यक्रम में संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के अधिकारी, कलाकार, साहित्यकार, पत्रकार, विद्यार्थी और बड़ी संख्या में कला-संस्कृति प्रेमी मौजूद रहे। मुक्ताकाशी मंच पर सजा यह आयोजन छत्तीसगढ़ की माटी, लोकजीवन और पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक विरासत को एक साथ प्रस्तुत कर रहा है।






