Breaking

रायपुर अधिवक्ता संघ चुनाव 2026: अध्यक्ष पद पर घमासान, होरी लाल और कमलेश पांडे ने ठोकी ताल; समर्थकों में भारी जोश

Chhattisgarh 02 April 2026 (48)

post

NV News - राजधानी रायपुर के जिला न्यायालय परिसर में चुनावी पारा चढ़ गया है। रायपुर जिला अधिवक्ता संघ चुनाव 2026 की नामांकन प्रक्रिया के दौरान आज भारी गहमागहमी देखने को मिली। अध्यक्ष पद के प्रबल दावेदार होरी लाल और कमलेश पांडे ने अपने-अपने समर्थकों के विशाल हुजूम के साथ नामांकन दाखिल किया। कोर्ट परिसर 'वकील एकता जिंदाबाद' के नारों से गूंज उठा। वकीलों के सबसे बड़े संगठन के इस चुनाव को लेकर न केवल स्थानीय अधिवक्ताओं में, बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी खासी चर्चा है।

Advertisement

सीधा मुकाबला: अनुभव बनाम युवा जोश

अध्यक्ष पद के लिए मैदान में उतरे दोनों ही प्रत्याशी अपनी-अपनी जीत को लेकर आश्वस्त नजर आ रहे हैं। एक ओर जहाँ होरी लाल अपने लंबे अनुभव और अधिवक्ताओं के पुराने मुद्दों को सुलझाने के वादे के साथ मैदान में हैं, वहीं कमलेश पांडे युवा वकीलों की नई ऊर्जा और डिजिटल बार (Digital Bar) की अवधारणा के साथ चुनावी दंगल में उतरे हैं। नामांकन के दौरान दोनों ही खेमों ने फूल-मालाओं और ढोल-धमाकों के साथ अपनी ताकत दिखाई, जिससे मुकाबला अब बेहद रोचक मोड़ पर पहुँच गया है।

मुद्दों की जंग: बार और बेंच का तालमेल

नामांकन के बाद मीडिया से चर्चा करते हुए प्रत्याशियों ने अपने प्राथमिकताएं गिनाईं। अधिवक्ताओं के लिए बेहतर चैम्बर की व्यवस्था, महिला वकीलों के लिए सुविधाओं का विस्तार, और कोर्ट परिसर की सुरक्षा जैसे मुद्दे इस बार केंद्र में हैं। इसके अलावा, वरिष्ठ अधिवक्ताओं के लिए पेंशन योजना और जूनियर वकीलों के लिए स्टाइपेंड (Stipend) की मांग भी चुनावी घोषणा पत्र का अहम हिस्सा बनने वाली है। उम्मीदवारों का कहना है कि संघ की गरिमा को नई ऊंचाइयों पर ले जाना उनका मुख्य उद्देश्य है।

तारीखों का ऐलान और सुरक्षा के इंतजाम

चुनाव अधिकारी ने नामांकन पत्रों की जांच और नाम वापसी की समय-सीमा स्पष्ट कर दी है। इसके बाद पात्र उम्मीदवारों की अंतिम सूची जारी की जाएगी। मतदान के दिन कोर्ट परिसर में सुरक्षा के कड़े प्रबंध रहेंगे ताकि सुगम और पारदर्शी निर्वाचन संपन्न कराया जा सके। रायपुर जिला अधिवक्ता संघ में हजारों मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। फिलहाल, होरी लाल और कमलेश पांडे के नामांकन के साथ ही कचहरी के चैम्बरों से लेकर गलियारों तक केवल चुनावी रणनीतियों पर ही चर्चा हो रही है।

You might also like!