राजधानी रायपुर का एक्सप्रेस-वे एक बार फिर हादसों और अव्यवस्थाओं के कारण चर्चा में है। ताजा मामले में सुरक्षा इंतजामों की भारी कमी के चलते एक बाइक सवार युवक गहरे नाले में जा गिरा। यह घटना उस स्थान पर हुई जहाँ सड़क और नाले के बीच किसी भी प्रकार की रेलिंग या बेरीकेडिंग नहीं की गई है। अंधेरे और सुरक्षा घेरा न होने के कारण बाइक अनियंत्रित होकर सीधे नीचे गिर गई, जिससे युवक को गंभीर चोटें आई हैं।
लापरवाही बनी जानलेवा
एक्सप्रेस-वे पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी अब आम हो गई है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि सड़क के निर्माण के बाद से कई महत्वपूर्ण स्थानों पर गार्ड रेल और बेरीकेडिंग का काम अधूरा छोड़ दिया गया है। विशेषकर पुलिया और नालों के पास सुरक्षा दीवार न होना सीधे तौर पर मौत को दावत देने जैसा है। प्रशासन की इस सुस्ती का खामियाजा आए दिन राहगीरों को अपनी जान जोखिम में डालकर भुगतना पड़ रहा है।
अंधेरे और तेज रफ्तार का कहर
हादसे का एक बड़ा कारण एक्सप्रेस-वे के कई हिस्सों में स्ट्रीट लाइट का न जलना भी है। रात के समय विजिबिलिटी कम होने के कारण वाहन चालकों को सड़क के किनारों और खुले हुए नालों का अंदाजा नहीं लग पाता। तेज रफ्तार वाहनों के लिए यह स्थिति और भी घातक हो जाती है। घायल युवक को मौके पर मौजूद लोगों ने कड़ी मशक्कत के बाद बाहर निकाला और अस्पताल पहुँचाया, जहाँ उसका उपचार जारी है।
आम जनता में बढ़ता आक्रोश
इस घटना के बाद से स्थानीय लोगों और राहगीरों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का आरोप है कि शिकायत के बावजूद संबंधित विभाग इन 'डेथ ट्रैप' को ठीक करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है। सोशल मीडिया पर भी इस हादसे की तस्वीरें वायरल हो रही हैं, जिसमें लोग मुख्यमंत्री और लोक निर्माण विभाग (PWD) से एक्सप्रेस-वे की सुरक्षा ऑडिट कराने की मांग कर रहे हैं।
क्या सुधरेगा एक्सप्रेस-वे का हाल?
सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है? एक्सप्रेस-वे का उद्देश्य सफर को सुगम और तेज बनाना था, लेकिन वर्तमान में यह हादसों का केंद्र बनता जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक खतरनाक टर्निंग पॉइंट्स और खुले नालों की बेरीकेडिंग नहीं की जाएगी, तब तक ऐसे हादसों पर लगाम लगाना नामुमकिन होगा। अब देखना होगा कि विभाग इस घटना से सबक लेकर मरम्मत कार्य शुरू करता है या नहीं।








