राजधानी रायपुर में साइबर अपराध का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां शातिर ठगों ने 'वर्क फ्रॉम होम' के जरिए मोटी कमाई का लालच देकर एक व्यक्ति से 24 लाख रुपये ठग लिए। ठगों ने पीड़ित को शुरुआत में छोटे टास्क देकर उसका भरोसा जीता और फिर धीरे-धीरे निवेश के नाम पर लाखों रुपये अपने खातों में ट्रांसफर करवा लिए। जब पीड़ित को एहसास हुआ कि वह ठगी का शिकार हो चुका है, तब तक काफी देर हो चुकी थी।
पुलिस की बड़ी कार्रवाई, तीन गिरफ्तार
ठगी की शिकायत मिलते ही रायपुर पुलिस की साइबर सेल और एंटी क्राइम यूनिट सक्रिय हो गई। तकनीकी जांच और बैंक खातों के लेन-देन का पीछा करते हुए पुलिस ने इस गिरोह के तीन मुख्य सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया है। पकड़े गए आरोपी अंतरराज्यीय गिरोह के बताए जा रहे हैं, जो देश के अलग-अलग हिस्सों में बैठकर अपना जाल फैला रहे थे। उनके पास से मोबाइल फोन, सिम कार्ड और कई बैंक खातों के दस्तावेज बरामद हुए हैं।
पुलिस की जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि गिरफ्तार किए गए इन ठगों के खिलाफ केवल रायपुर ही नहीं, बल्कि अलग-अलग जिलों के कुल 14 थानों में ठगी के मामले दर्ज थे। यह गिरोह काफी समय से पुलिस की रडार पर था, लेकिन अपनी लोकेशन बदलकर बार-बार बच रहा था। पुलिस की इस सफलता ने साइबर अपराधियों के एक बड़े नेटवर्क को कमजोर कर दिया है।
कैसे काम करता था यह गिरोह?
आरोपी सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स के जरिए लोगों से संपर्क करते थे। वे नामी कंपनियों के प्रतिनिधि बनकर ऑनलाइन रिव्यू या डेटा एंट्री जैसे काम का ऑफर देते थे। शुरुआत में पीड़ित को कुछ पैसे रिटर्न के तौर पर दिए जाते थे ताकि उसे यकीन हो जाए। इसके बाद 'प्रीमियम टास्क' और 'रजिस्ट्रेशन फीस' के नाम पर भारी रकम जमा कराई जाती थी। पीड़ित की जमापूंजी हड़पने के बाद आरोपी अचानक संपर्क तोड़ देते थे।
पुलिस की जनता से अपील
रायपुर पुलिस ने इस मामले के बाद नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि किसी भी अनजान लिंक या व्हाट्सएप पर आने वाले 'घर बैठे पैसा कमाएं' जैसे ऑफर्स पर भरोसा न करें। बिना आधिकारिक पुष्टि के किसी को भी ऑनलाइन पैसे न भेजें। यदि कोई ठगी का शिकार होता है, तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें।







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