रायपुर के पास चंदखुरी स्थित विश्व के एकमात्र कौशल्या माता मंदिर (कौशल्या धाम) में भगवान राम की नई प्रतिमा की स्थापना को लेकर सस्पेंस गहरा गया है। पिछली सरकार के दौरान मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण और राम वन गमन पथ परियोजना के तहत यहां एक भव्य प्रतिमा लगाने की योजना बनाई गई थी। हालांकि, काफी समय बीत जाने के बाद भी न तो पुरानी प्रतिमा को लेकर उठा विवाद सुलझा है और न ही नई प्रतिमा स्थापित हो पाई है, जिससे श्रद्धालुओं में निराशा है।
प्रतिमा की गुणवत्ता पर उठा था सवाल
विवाद की मुख्य जड़ स्थापित की गई प्रतिमा की गुणवत्ता और उसके निर्माण को लेकर है। जब पूर्ववर्ती सरकार ने यहां भगवान राम की विशाल प्रतिमा लगवाई थी, तब उसकी बनावट और फिनिशिंग को लेकर कई आपत्तियां दर्ज की गई थीं। इसके बाद प्रशासन ने प्रतिमा को बदलने का निर्णय लिया था और नई मूर्ति के निर्माण के आदेश दिए गए थे। लेकिन हैरानी की बात यह है कि नई प्रतिमा तैयार होने के बावजूद उसे अब तक स्थापित नहीं किया गया है।
जांच समिति की सुस्त रफ्तार
इस पूरे मामले में भ्रष्टाचार और तकनीकी खामियों की जांच के लिए एक विशेष समिति का गठन किया गया था। इस समिति को प्रतिमा निर्माण में हुई अनियमितताओं और गुणवत्ता की कमी की जांच कर रिपोर्ट सौंपनी थी। लेकिन रिपोर्ट तो दूर, समिति की सक्रियता पर ही सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल जांच समिति की फाइल और नई प्रतिमा, दोनों ही 'ठंडे बस्ते' में नजर आ रही हैं, जिससे इस धार्मिक स्थल के विकास कार्य रुके हुए हैं।
राजनीतिक खींचतान और सस्पेंस
सत्ता परिवर्तन के बाद यह मामला और भी पेचीदा हो गया है। जहां एक ओर श्रद्धालु और स्थानीय लोग जल्द से जल्द भगवान राम की भव्य प्रतिमा की स्थापना की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक प्रक्रियाओं और जांच के नाम पर हो रही देरी ने इसे एक राजनीतिक मुद्दा बना दिया है। अब देखना यह होगा कि नई सरकार इस 'ठंडे बस्ते' में पड़े मामले को कब तक सुलझाती है और कौशल्या धाम में भगवान राम की गरिमापूर्ण प्रतिमा कब स्थापित होती है।








