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सहयोगियों पर कार्रवाई से आहत पूर्व CM भूपेश बघेल: बोले- "मेरे करीबियों पर एक्शन का ढोल पीटा जाता है, लेकिन अफीम कांड पर सब चुप"

रायपुर: छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का दर्द एक बार फिर सार्वजनिक रूप से छलक उठा है। अपने करीबियों और सहयोगियों पर लगातार हो रही भ्रष्टाचार की जांच और कानूनी कार्रवाइयों के बीच बघेल ने मीडिया पर तीखा प्रहार किया है। रायपुर में पत्रकारों से चर्चा के दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि उनके सहयोगियों के खिलाफ होने वाली छोटी से छोटी कार्रवाई को भी 'बड़ा' बनाकर पेश किया जाता है, जबकि वर्तमान सत्ता पक्ष से जुड़े लोगों के मामलों पर रहस्यमयी चुप्पी साध ली जाती है।

भूपेश बघेल ने हाल ही में प्रदेश के दुर्ग और बेमेतरा जिलों में उजागर हुए अफीम खेती कांड का हवाला देते हुए मीडिया की रिपोर्टिंग पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष के नेताओं के करीबियों के खेतों में नशीली फसलें मिल रही हैं, लेकिन न तो जांच एजेंसियां उस तत्परता से काम कर रही हैं और न ही मीडिया इस मुद्दे को प्रमुखता दे रहा है। बघेल ने इसे 'दोहरा मापदंड' करार देते हुए कहा कि केवल विपक्षी नेताओं को बदनाम करने के लिए एजेंसियों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि जब उनके परिवार या सहयोगियों पर शराब घोटाले या महादेव ऐप जैसे मामलों में आरोप लगते हैं, तो मीडिया में उनके चरित्र हनन का प्रयास किया जाता है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि मीडिया को सत्ता से सवाल पूछने की अपनी जिम्मेदारी नहीं भूलनी चाहिए। बघेल के अनुसार, उनके शासनकाल के दौरान जिन नीतियों पर काम हुआ, उन्हें अब जानबूझकर भ्रष्टाचार के चश्मे से देखा जा रहा है ताकि कांग्रेस की छवि खराब की जा सके।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बघेल का यह बयान उनके बेटे चैतन्य बघेल और अन्य करीबियों पर कसते जा रहे कानूनी शिकंजे की हताशा को दर्शाता है। गौरतलब है कि भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने हाल ही में कई चार्जशीट पेश की हैं, जिनमें बघेल के करीबियों पर करोड़ों के लेन-देन के आरोप हैं। दूसरी ओर, बघेल ने साफ कर दिया है कि वे इन कार्रवाइयों से डरने वाले नहीं हैं और जनता के बीच जाकर इस 'राजनीतिक प्रतिशोध' का पर्दाफाश करेंगे।







