RRT News - छत्तीसगढ़ की राजधानी का रायपुर रेलवे स्टेशन इन दिनों यात्रियों के लिए किसी मुसीबत से कम नहीं है। भीषण गर्मी और 43-44 डिग्री के चढ़ते पारे के बीच, रेल यात्रियों को एक अदद टिकट के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ रही है। स्थिति यह है कि स्टेशन के मुख्य द्वार से टिकट काउंटर तक पहुँचने और फिर प्लेटफॉर्म तक जाने के लिए यात्रियों को सामान लेकर तपती धूप में करीब 100 मीटर की दौड़ लगानी पड़ रही है। सुविधाओं के नाम पर 'राजधानी' का यह स्टेशन फिलहाल बदहाली का शिकार है।
टिकट काउंटर शिफ्टिंग और मशीनों ने बढ़ाई मुसीबत
यात्रियों की इस परेशानी की मुख्य वजह हाल ही में हुई टिकट काउंटरों की शिफ्टिंग है। स्टेशन पर चल रहे निर्माण कार्यों के कारण काउंटरों को ऐसी जगह भेज दिया गया है, जहाँ तक पहुँचना बुजुर्गों और बच्चों के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। रही-सही कसर स्टेशन पर लगी ATVM (ऑटोमैटिक टिकट वेंडिंग मशीन) ने पूरी कर दी है। अधिकांश मशीनें या तो खराब हैं या उनमें तकनीकी खराबी के कारण टिकट नहीं निकल रहे, जिससे जनरल टिकट खिड़की पर लंबी कतारें लग रही हैं।
शेड की कमी और लू के थपेड़ों से हाल बेहाल
स्टेशन परिसर के बाहर और टिकट काउंटर की ओर जाने वाले मार्ग पर पर्याप्त शेड (छाया) की व्यवस्था नहीं है। दोपहर के समय जब लू के थपेड़े चलते हैं, तब यात्रियों को खुले आसमान के नीचे घंटों खड़ा रहना पड़ता है। पीने के पानी के लिए भी यात्रियों को लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है। यात्रियों का कहना है कि एक तरफ रेलवे 'अमृत भारत स्टेशन' योजना के तहत आधुनिकीकरण की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर मूलभूत सुविधाओं के अभाव में लोग बीमार पड़ रहे हैं।
प्रबंधन की चुप्पी और यात्रियों का गुस्सा
रायपुर रेल मंडल के इस महत्वपूर्ण स्टेशन पर फैली अव्यवस्था को लेकर यात्रियों में भारी आक्रोश है। दैनिक यात्रियों का आरोप है कि काउंटर बदलने से पहले वैकल्पिक छायादार मार्ग की व्यवस्था की जानी चाहिए थी। वहीं, रेलवे प्रशासन निर्माण कार्य का हवाला देकर पल्ला झाड़ता नजर आ रहा है। बिना किसी पूर्व सूचना और पर्याप्त बुनियादी ढांचे के किए गए इन बदलावों ने राजधानी के गौरव कहे जाने वाले इस स्टेशन की व्यवस्थाओं की पोल खोलकर रख दी है।








