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नैनो यूरिया और नैनो DAP से चमकी किसान की किस्मत: दुर्ग के पुरेंद्र कुमार ने धान की फसल में पाई बंपर पैदावार, लागत भी हुई आधी

रायपुर। कृषि के क्षेत्र में कदम रख रही आधुनिक और वैज्ञानिक तकनीकों ने छत्तीसगढ़ के अन्नदाताओं की किस्मत बदलना शुरू कर दिया है। दुर्ग जिले के ग्राम डूंडेरा के एक प्रगतिशील किसान पुरेंद्र कुमार यादव पारंपरिक खेती को छोड़कर आधुनिक कृषि का एक नया और प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरे हैं। पुरेंद्र कुमार ने इस बार अपनी धान की फसल में पारंपरिक बोरा बंद खाद की जगह इफको (IFFCO) के नैनो डीएपी (Nano DAP) और नैनो यूरिया (Nano Urea) तकनीक का इस्तेमाल किया, जिसके बेहद चमत्कारी और उत्साहजनक परिणाम सामने आए हैं। इससे न केवल धान के उत्पादन की गुणवत्ता सुधरी है, बल्कि खेती की कुल लागत में भी भारी कमी आई है।

प्रगतिशील किसान पुरेंद्र यादव ने अपनी सफलता की कहानी साझा करते हुए बताया कि कृषि विभाग के अधिकारियों के उचित मार्गदर्शन में उन्होंने इस बार प्रयोग के तौर पर नैनो उर्वरकों का छिड़काव किया था। इसके इस्तेमाल से फसल को बेहद संतुलित और असरदार पोषण मिला। पौधों की वृद्धि आम दिनों के मुकाबले काफी अच्छी हुई और उनकी कल्लेदार मजबूती देखकर यह साफ हो गया कि नैनो तकनीक सीधे पौधों के पत्तों तक पोषण पहुंचाती है। फसल पारंपरिक खाद के मुकाबले कहीं अधिक स्वस्थ, हरी-भरी और रोगमुक्त नजर आई, जिसका सीधा और सकारात्मक असर धान की कुल उपज पर पड़ा है।
पुरेंद्र के मुताबिक, पारंपरिक यूरिया और डीएपी के भारी-भरकम बोरों को बाजार से लाना, परिवहन का भारी खर्च उठाना और फिर उन्हें स्टोर करके खेतों में डालना एक बेहद थकाऊ और खर्चीला काम था। इसके विपरीत, नैनो उर्वरक की छोटी बोतलें न केवल लाने-ले जाने में बेहद सुविधाजनक हैं, बल्कि किफायती भी हैं। बहुत कम मात्रा में उपयोग होने के बावजूद इन्होंने फसल को भरपूर पोषण दिया, जिससे खाद की लागत के साथ-साथ मजदूरी (श्रम) और परिवहन का खर्च भी बच गया।
धान की फसल में उम्मीद से कहीं ज्यादा बेहतर और बंपर परिणाम मिलने से उत्साहित पुरेंद्र कुमार अब अपने क्षेत्र के अन्य किसान भाइयों को भी इस वैज्ञानिक व पर्यावरण-अनुकूल नवाचार को अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उनका कहना है कि नैनो यूरिया और नैनो डीएपी आने वाले समय में हर किसान के सबसे भरोसेमंद साथी साबित होंगे। कृषि विभाग भी जिले के किसानों को लगातार इस ओर जागरूक कर रहा है, जिससे कम लागत में अधिक मुनाफा कमाकर खेती को एक मुनाफे का सौदा बनाया जा सके।







