जांजगीर-चांपा जिले के द्वितीय अपर सत्र न्यायालय (न्यायाधीश गणेश राम पटेल) ने आज एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य आरोपी पोरा बाई, तत्कालीन केंद्राध्यक्ष फूल साय, बिर्रा हाईस्कूल के प्राचार्य एस.एल. जाटव और दीपक जाटव को दोषी करार दिया। इन चारों को 5-5 साल की कठोर कारावास और 5-5 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई है।
क्या था पोरा बाई नकल कांड?
यह मामला साल 2008 का है, जिसने पूरे छत्तीसगढ़ के शिक्षा जगत को हिला दिया था:
फर्जी टॉपर: 12वीं बोर्ड की मेरिट लिस्ट में पोरा बाई नाम की छात्रा ने पूरे प्रदेश में प्रथम स्थान हासिल किया था।
जांच में खुलासा: माध्यमिक शिक्षा मंडल के तत्कालीन सचिव को संदेह हुआ, जिसके बाद जांच में पाया गया कि छात्रा की उत्तर पुस्तिकाओं (Answer Sheets) को फर्जी तरीके से बदल दिया गया था। छात्रा वास्तव में अपात्र थी, लेकिन उसे जालसाजी के जरिए टॉप कराया गया था।
पुलिस कार्रवाई: बम्हनीडीह पुलिस ने इस मामले में जालसाजी और दस्तावेज में हेराफेरी की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था।
निचली अदालत से बरी, उच्च न्यायालय में अपील
हैरानी की बात यह है कि इस मामले में चांपा के न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी ने साल 2020 में सभी 9 आरोपियों को 'साक्ष्य के अभाव' में दोषमुक्त (बरी) कर दिया था। शासन ने इस फैसले के खिलाफ 25 दिसंबर 2020 को अपील दायर की। इसी अपील पर सुनवाई करते हुए अपर सत्र न्यायालय ने आज निचली अदालत का फैसला रद्द कर दोषियों को सजा सुनाई।
कोर्ट की तीखी टिप्पणी
सजा सुनाते समय कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा:
"आरोपियों ने केवल माध्यमिक शिक्षा मंडल के विरुद्ध अपराध नहीं किया, बल्कि उन हजारों मेहनती छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है जो दिन-रात मेहनत कर अपनी परीक्षा की तैयारी करते हैं। ऐसे कृत्य से समाज का शिक्षा प्रणाली पर से भरोसा उठता है।"
दोषियों की सूची और सजा
पोरा बाई (छात्रा): 5 साल की जेल।
फूल साय (तत्कालीन केंद्राध्यक्ष): 5 साल की जेल।
एस.एल. जाटव (प्राचार्य, बिर्रा हाईस्कूल): 5 साल की जेल।
दीपक जाटव (संलिप्तता): 5 साल की जेल।







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