छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में सुरक्षा बलों ने नक्सलियों के वित्तीय और लॉजिस्टिक नेटवर्क पर अब तक की सबसे बड़ी चोट की है। पिछले दो हफ्तों से चल रहे सघन तलाशी अभियान के दौरान जवानों ने नक्सलियों द्वारा जमीन के अंदर दबाकर रखे गए ₹65.52 लाख नकद बरामद किए हैं। यह कार्रवाई जिला पुलिस, डीआरजी (DRG), एसटीएफ (STF), सीआरपीएफ (CRPF) और कोबरा कमांडो के संयुक्त तत्वावधान में की गई है। 31 मार्च 2026 को छत्तीसगढ़ को सशस्त्र माओवादियों से मुक्त घोषित किए जाने के बाद यह एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
बीजापुर के पुलिस अधीक्षक (SP) जितेंद्र कुमार यादव ने बताया कि यह सफलता ग्रामीणों के सहयोग और मजबूत खुफिया तंत्र की मदद से मिली है। नक्सलियों ने जंगलों के भीतर दुर्गम ठिकानों पर पैसा और गोला-बारूद डंप कर रखा था। सुरक्षा बलों ने तीन अलग-अलग ठिकानों से न केवल नकदी, बल्कि 32 अत्याधुनिक हथियार भी जब्त किए हैं। इन हथियारों में लाइट मशीन गन (LMG), एसएलआर (SLR), कार्बाइन, और .303 राइफलें शामिल हैं। इसके अलावा भारी मात्रा में विस्फोटक और दैनिक उपयोग की सामग्री भी मिली है।
जब्त किए गए हथियारों और विस्फोटकों में 140 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट और यूरिया भी शामिल है, जिसका इस्तेमाल आईईडी (IED) बनाने के लिए किया जाना था। सुरक्षा बलों की इस "स्ट्राइक" ने नक्सलियों की सप्लाई लाइन और भविष्य में होने वाली हिंसक घटनाओं की साजिश को पूरी तरह नाकाम कर दिया है। आंकड़ों के मुताबिक, 2025 से 2026 के बीच अब तक केवल बीजापुर जिले से ही 461 हथियार बरामद किए जा चुके हैं, जो नक्सलियों के कमजोर होते आधार को दर्शाता है।
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि सशस्त्र माओवादियों के खात्मे के बाद अब उनके द्वारा वर्षों से छिपाकर रखे गए संसाधनों को ढूंढना प्राथमिकता है। इस अभियान का उद्देश्य बस्तर क्षेत्र को पूरी तरह सुरक्षित और भयमुक्त बनाना है। बरामद की गई भारी भरकम राशि और हथियारों से यह स्पष्ट है कि नक्सली अब भी अपनी आर्थिक जड़ें जमाने की कोशिश में थे, जिसे सुरक्षा बलों ने समय रहते उखाड़ फेंका। क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन अब भी जारी है ताकि बचे हुए अन्य 'डंप' का भी पता लगाया जा सके।








