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भारत के लिए फ्रांस बनेगा 'नया रूस': मुंबई में पीएम मोदी और मैक्रों की ऐतिहासिक मुलाकात, 114 राफेल डील पर लग सकती है मुहर

मुंबई/नई दिल्ली: भारत और फ्रांस के बीच सामरिक साझेदारी आज एक नए युग में प्रवेश करने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों आज (17 फरवरी 2026) मुंबई में मुलाकात कर रहे हैं। इस यात्रा को रक्षा गलियारों में 'फ्रांस: भारत का नया रूस' के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि रूस पर पारंपरिक निर्भरता के बाद अब फ्रांस भारत के सबसे भरोसेमंद और उच्च-तकनीकी रक्षा साझेदार के रूप में उभरा है।

राफेल मेगा डील: 3.25 लाख करोड़ का रक्षा सौदा
इस मुलाकात का सबसे बड़ा आकर्षण वायुसेना के लिए 114 मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) की खरीद का प्रस्ताव है। हाल ही में रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने इसके लिए 'आवश्यकता की स्वीकृति' (AoN) दे दी है।
मेक इन इंडिया: डील के तहत 18 विमान 'रेडी-टू-फ्लाई' स्थिति में आएंगे, जबकि शेष 96 का निर्माण भारत में ही किया जाएगा।
नौसेना को भी पंख: इसके साथ ही भारतीय नौसेना के लिए 26 राफेल-एम (मरीन) विमानों की डील भी अंतिम चरण में है, जो आईएनएस विक्रांत के लिए गेम-चेंजर साबित होंगे।
मुंबई में कार्यक्रमों की रूपरेखा
राष्ट्रपति मैक्रों दोपहर करीब 3:15 बजे मुंबई के लोक भवन में पीएम मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे।
इंडिया-फ्रांस इनोवेशन वर्ष 2026: शाम 5:15 बजे दोनों नेता संयुक्त रूप से 'नवाचार वर्ष' का उद्घाटन करेंगे।
AI इम्पैक्ट समिट: मैक्रों दिल्ली में आयोजित होने वाले वैश्विक एआई शिखर सम्मेलन में भी भाग लेंगे, जो भारत की तकनीकी धमक को दर्शाता है।
हॉरिजोन 2047: बैठक में अगले 25 वर्षों के रोडमैप पर चर्चा होगी, जिसमें अंतरिक्ष, सिविल न्यूक्लियर और साइबर सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं।
फ्रांस क्यों है 'नया रूस'?
जिस तरह शीत युद्ध के दौरान रूस ने भारत को तकनीक हस्तांतरण (ToT) और संकट के समय बिना शर्त सैन्य आपूर्ति की थी, आज वही भूमिका फ्रांस निभा रहा है। फ्रांस न केवल हथियार बेच रहा है, बल्कि 'सह-विकास और सह-उत्पादन' के मंत्र के साथ भारत को रक्षा विनिर्माण का वैश्विक हब बनाने में मदद कर रहा है।







