रायपुर में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना को लेकर एक ऐसा खुलासा हुआ है जिसने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। सरकारी जांच में सामने आया है कि जिले में 2,163 मृत व्यक्तियों के बैंक खातों में अभी भी योजना की राशि धड़ल्ले से भेजी जा रही है। यह बड़ा फर्जीवाड़ा तब पकड़ा गया जब विभाग ने लाभार्थियों के डेटा का भौतिक सत्यापन शुरू किया। स्वर्ग सिधार चुके लोगों के नाम पर सरकारी पैसे का यह बंदरबांट लंबे समय से सिस्टम की नाक के नीचे चल रहा था।
इतना ही नहीं, जाँच के दौरान 1,310 ऐसे लाभार्थी भी पाए गए हैं जो इस योजना के लिए पूरी तरह अपात्र हैं। नियमों को ताक पर रखकर कई अमीर और साधन संपन्न लोग भी गरीब किसानों के हक का पैसा डकार रहे थे। रायपुर जिला प्रशासन की रिपोर्ट के अनुसार, इनमें से कई लोग आयकर दाता हैं या सरकारी नियमों के दायरे से बाहर हैं, फिर भी फर्जी दस्तावेजों के सहारे किस्तों का लाभ उठा रहे थे।
इस घोटाले के सामने आने के बाद अब सरकार सख्त एक्शन के मूड में है। रायपुर के कृषि विभाग ने साफ कर दिया है कि जिन अपात्रों और मृतकों के वारिसों ने गलत तरीके से पैसा निकाला है, उनसे पाई-पाई की वसूली की जाएगी। प्रशासन ने ऐसे सभी खातों को फ्रीज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी भी की जा रही है।
अधिकारियों का कहना है कि डेटा मिलान में हुई लापरवाही और ई-केवाईसी (e-KYC) न होने का फायदा उठाकर यह खेल खेला गया। अब रायपुर के सभी ब्लॉक में सघन जांच अभियान चलाया जा रहा है ताकि असली पात्र किसानों को ही योजना का लाभ मिल सके। यह फर्जीवाड़ा न केवल सरकारी धन की बर्बादी है, बल्कि उन जरूरतमंद किसानों के साथ भी धोखा है जो आज भी सहायता की उम्मीद में कतारों में खड़े हैं।








