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छत्तीसगढ़: प्रधानमंत्री-अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (PM-AASHA) के तहत दलहनी-तिलहनी फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी जल्द होगी शुरू..

रायपुर/खैरागढ़: छत्तीसगढ़ राज्य में प्रधानमंत्री-अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (PM-AASHA) के अंतर्गत प्राइस सपोर्ट स्कीम के तहत दलहनी एवं तिलहनी फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदी शीघ्र प्रारंभ की जाएगी। इस पहल का उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित कराना है।

पिछले वर्ष राज्य के 18 जिलों में 152 उपार्जन केंद्र स्थापित किए गए थे। कृषि विभाग खैरागढ़ के उपसंचालक, राजकुमार सोलंकी के अनुसार, इस योजना में अरहर, उड़द और मसूर का शत-प्रतिशत, जबकि मूंगफली, सोयाबीन, मूंग, चना और सरसों का 25 प्रतिशत उपार्जन किया जाता है। केंद्र सरकार की प्रापण संस्थाएं नाफेड (NAFED) और एन.सी.सी.एफ. (NCCF) इस कार्य का संचालन करेंगी।
पंजीयन और उपार्जन अवधि:
योजना का लाभ लेने के इच्छुक कृषकों को एकीकृत किसान पोर्टल पर पंजीयन कराना अनिवार्य है, जिसमें वे अपनी सुविधा के अनुसार समीपस्थ या अन्य जिले के उपार्जन केंद्र का चयन कर सकते हैं।
उपसंचालक सोलंकी ने बताया कि खरीफ में उत्पादित मूंग, उड़द, सोयाबीन एवं मूंगफली की खरीदी शीघ्र शुरू होगी। इसके बाद खरीफ की अरहर और रबी की चना, मसूर एवं सरसों फसलों का उपार्जन किया जाएगा। प्रत्येक अधिसूचित फसल की उपार्जन अवधि 90 दिन निर्धारित की गई है, जिसे कलेक्टर के प्रस्ताव पर बढ़ाया जा सकता है।
किसानों को लाभ और फसल विविधीकरण को बढ़ावा:
राज्य सरकार इस योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार पर जोर दे रही है ताकि अधिक से अधिक किसान इससे लाभान्वित हो सकें। यह योजना न केवल किसानों को उचित मूल्य दिलाकर बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ाएगी, बल्कि फसल विविधीकरण (Crop Diversification) को भी बढ़ावा देगी। इससे राज्य एक-फसलीय कृषि से बहु-फसलीय कृषि की ओर अग्रसर होगा।
राज्य सरकार ने सभी जिला उप संचालक कृषि को फसल रकबा, संभावित उत्पादन और उपार्जन एवं भंडारण केंद्रों के निर्धारण संबंधी जानकारी जल्द से जल्द प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं, ताकि उपार्जन केंद्रों के निर्धारण का प्रस्ताव भारत सरकार को अनुमोदन के लिए भेजा जा सके।







