छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के पाटन ब्लॉक में कृषि विभाग की जिला स्तरीय जांच टीम ने खाद की कालाबाजारी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। जांच में निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर उर्वरक बेचने और स्टॉक में गंभीर अनियमितताएं पाए जाने के बाद 'मेसर्स कृषि सेवा केंद्र' के संचालक रूपेश कश्यप के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 3 एवं 7 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।
यह कार्रवाई वरिष्ठ उर्वरक निरीक्षक एवं प्रभारी वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी पुष्पा रामटेके की शिकायत के आधार पर की गई।
तय कीमत से अधिक में बेचे जा रहे थे उर्वरक
जांच में सामने आया कि ₹266 कीमत वाली यूरिया की बोरी ₹500 में बेची जा रही थी। वहीं ₹1,500 मूल्य की डीएपी खाद ₹2,000 में किसानों को बेचे जाने का आरोप है। इसके अलावा स्टॉक रजिस्टर और उपलब्ध उर्वरकों में भी भारी अंतर पाया गया।
आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कार्रवाई
कृषि विभाग की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने संचालक के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 3 एवं 7 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। विभाग का कहना है कि किसानों के हितों से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
किसानों से की अपील
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे केवल निर्धारित मूल्य पर ही उर्वरक खरीदें। यदि कोई विक्रेता तय कीमत से अधिक राशि वसूलता है या बिल देने से इनकार करता है, तो इसकी सूचना तत्काल कृषि विभाग या स्थानीय प्रशासन को दें।







