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पर्यावरण के धुरंधर: जिनसे गंदगी कांपती है और कचरा भय खाता है; मिलिए छत्तीसगढ़ के इन असली 'सुपरहीरोज' से

Raipur: जब हम चैन की नींद सो रहे होते हैं, तब कुछ लोग सड़कों पर उतर आते हैं। उनके हाथों में झाड़ू होती है, कंधों पर ज़िम्मेदारी और मन में शहर को संवारने का जज्बा। इन्हें लोग 'कचरा साफ करने वाला' कहते हैं, लेकिन असल में ये 'पर्यावरण के धुरंधर' हैं। छत्तीसगढ़ के गली-मोहल्लों में काम करने वाले ये स्वच्छता कर्मी ही वो योद्धा हैं जिनसे आज गंदगी कांपती है।

1. सुबह 5 बजे से शुरू होता है 'युद्ध'
आम आदमी के लिए दिन की शुरुआत चाय की चुस्की से होती है, लेकिन इन योद्धाओं के लिए यह समय कचरे से जंग लड़ने का होता है। चाहे कड़ाके की ठंड हो या मूसलाधार बारिश, इनके कदम नहीं रुकते। घर-घर जाकर गीला और सूखा कचरा अलग करना (Source Segregation) इनकी दिनचर्या का सबसे अहम हिस्सा है।
2. कचरा नहीं, यह 'संपत्ति' है
छत्तीसगढ़, विशेषकर अम्बिकापुर मॉडल ने पूरी दुनिया को सिखाया है कि कचरा अभिशाप नहीं बल्कि 'संसाधन' है। इन धुरंधरों की मेहनत से:
गीला कचरा: खाद (Compost) बनाने में इस्तेमाल होता है।
सूखा कचरा: रिसाइकिल होकर फिर से बाजार में आता है।
प्लास्टिक: सड़कों के निर्माण और सीमेंट फैक्ट्रियों में ईंधन के रूप में उपयोग किया जा रहा है।
3. चुनौतियां: तिरस्कार नहीं, सम्मान के हकदार
विडंबना यह है कि जो समाज को साफ रखते हैं, समाज अक्सर उन्हें ही हेय दृष्टि से देखता है। गंदगी साफ करना उनका पेशा है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वे गंदे हैं। ये योद्धा अक्सर संक्रामक बीमारियों के खतरे के बीच काम करते हैं। 'खबर योद्धा' की इस रिपोर्ट का उद्देश्य इन्हें वह सम्मान दिलाना है, जिसके ये वास्तव में हकदार हैं।
4. छत्तीसगढ़ की 'स्वच्छता दीदियां'
प्रदेश के विकास में 'स्वच्छता दीदियों' का बड़ा योगदान है। स्व-सहायता समूहों से जुड़ी हज़ारों महिलाएं आज न सिर्फ अपने परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की कमान भी संभाल रही हैं। उनकी बदौलत छत्तीसगढ़ देश के सबसे स्वच्छ राज्यों की सूची में शीर्ष पर बना हुआ है।
निष्कर्ष
हमें यह समझने की ज़रूरत है कि गंदगी फैलाने वाला 'गंदा' होता है, उसे साफ करने वाला नहीं। ये पर्यावरण के धुरंधर हमारे समाज के असली नायक हैं। अगर आज ये अपना काम रोक दें, तो शहर नरक बन जाएंगे। अतः अगली बार जब आप किसी स्वच्छता कर्मी को देखें, तो नाक सिकोड़ने के बजाय एक मुस्कान के साथ उन्हें 'धन्यवाद' कहें।







