रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार लोककला की महान साधिका पद्म विभूषण स्वर्गीय तीजन बाई की स्मृतियों को चिरस्थायी बनाएगी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज दुर्ग जिले के ग्राम गनियारी पहुंचे, जहां उन्होंने विश्वविख्यात पंडवानी गायिका तीजन बाई के दशगात्र और श्रद्धांजलि सभा में शामिल होकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने उनके तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया और शोकसंतप्त परिजनों से भेंट कर अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं। इस दौरान मुख्यमंत्री ने दिवंगत गायिका के पुत्र दिलहरण पारधी और परिवार के अन्य सदस्यों को ढांढस बंधाया।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि तीजन बाई केवल छत्तीसगढ़ की नहीं, बल्कि पूरे देश की सांस्कृतिक पहचान थीं। उन्होंने अपनी अद्भुत साधना और पंडवानी की कापालिक शैली के माध्यम से छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को विश्व पटल पर एक नई पहचान दिलाई थी। उनकी इस महान विरासत को संजोए रखने के लिए राज्य सरकार ने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। इसके तहत रायपुर के संग्रहालय में उनकी जीवनभर की कला-साधना के प्रतीक रहे तंबूरे को पूरे सम्मान के साथ सुरक्षित रखा जाएगा।
इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि छत्तीसगढ़ राज्योत्सव के अवसर पर हर साल 'तीजन बाई लोककला अलंकरण' पुरस्कार प्रदान किया जाएगा, जिससे लोक कला के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले कलाकारों को सम्मानित किया जा सके। साथ ही, ग्राम गनियारी के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का नामकरण भी तीजन बाई के नाम पर किया जाएगा। इस श्रद्धांजलि सभा को सांसद विजय बघेल, संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल और विधायक अनुज शर्मा ने भी संबोधित किया। इस मौके पर स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष मोना सेन सहित बड़ी संख्या में कलाकार और ग्रामीण उपस्थित थे।







