रायपुर, 7 अगस्त 2026। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने प्रदेशवासियों से स्वदेशी उत्पादों को अपनाने और हथकरघा से निर्मित वस्तुओं के अधिकाधिक उपयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देना केवल आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि देश की सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक शिल्प और बुनकर परिवारों के सम्मान से जुड़ा अभियान है।
पारंपरिक गमछा पहनकर बुनकरों को दिया सम्मान
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर मंत्री राजेश अग्रवाल ने छत्तीसगढ़ के बुनकरों द्वारा तैयार पारंपरिक गमछा धारण कर प्रदेश की हथकरघा परंपरा को सम्मान दिया। उन्होंने कहा कि यह गमछा केवल पहनने की वस्तु नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान, मेहनत, परंपरा और स्थानीय शिल्प कौशल का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि जब लोग स्थानीय बुनकरों के बनाए उत्पादों को अपने दैनिक जीवन में शामिल करते हैं, तो इससे सीधे तौर पर उनकी आजीविका मजबूत होती है। साथ ही पारंपरिक कला और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में भी योगदान मिलता है।
'वोकल फॉर लोकल' को मजबूत बनाने की अपील
मंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ के बुनकर अपनी पारंपरिक कला और उत्कृष्ट शिल्पकौशल के जरिए प्रदेश की पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा रहे हैं। ऐसे शिल्पकारों का उत्साह बढ़ाना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने प्रदेशवासियों से हथकरघा उत्पादों को प्राथमिकता देने और 'वोकल फॉर लोकल' अभियान को मजबूत बनाने का आह्वान किया। उनके अनुसार, स्थानीय उत्पादों की खरीद से बुनकरों के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलती है।
सोशल मीडिया के जरिए बुनकरों की कला को दें पहचान
राजेश अग्रवाल ने नागरिकों से राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर अपने पसंदीदा हथकरघा उत्पादों के साथ फोटो या वीडियो साझा करने की अपील की। उन्होंने कहा कि जनभागीदारी के माध्यम से छत्तीसगढ़ समेत देशभर के बुनकरों की कला, मेहनत और हथकरघा की समृद्ध परंपरा को व्यापक पहचान दिलाई जा सकती है।
उन्होंने विश्वास जताया कि प्रदेशवासी स्वदेशी उत्पादों को अपनाकर 'वोकल फॉर लोकल' के संकल्प को मजबूत करेंगे और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में योगदान देंगे।







