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Aabujhmad Success Story: आजादी के बाद पहली बार पहुंचा राशन! अनाज देख छलक उठीं आदिवासियों की आंखें, दशकों का वनवास खत्म

Chhattisgarh RRT News Desk 17 April 2026

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नारायणपुर- छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग अंतर्गत नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ से एक ऐसी सुखद तस्वीर सामने आई है, जिसने विकास की नई इबारत लिख दी है। माओवाद के गढ़ और घने जंगलों के बीच बसे एक दुर्गम गांव में देश की आजादी के दशकों बाद पहली बार सरकारी राशन की गाड़ी पहुंची है। अपने ही गांव में चावल, नमक और गुड़ की बोरियां उतरते देख ग्रामीणों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा और वे झूम उठे। दशकों से भूखे पेट या मीलों पैदल चलकर राशन लाने वाले इन आदिवासियों के लिए यह किसी बड़े त्यौहार से कम नहीं था, क्योंकि अब उनके घर का चूल्हा बिना किसी मशक्कत के जल सकेगा।

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अबूझमाड़ का यह इलाका अपनी भौगोलिक विषमताओं और कठिन रास्तों के लिए जाना जाता है, जहाँ पहुंचना किसी चुनौती से कम नहीं था। प्रशासन की लंबी कोशिशों और सुरक्षा बलों के सहयोग से बनाए गए नए रास्तों के जरिए राशन की यह खेप सीधे ग्रामीणों तक पहुंची है। अब तक इन आदिवासियों को राशन लेने के लिए उफनते नालों और ऊबड़-खाबड़ पहाड़ों को पार कर कई किलोमीटर दूर जाना पड़ता था। कई बार तो खराब मौसम के कारण उन्हें हफ्तों तक भूखे रहने या कंद-मूल पर निर्भर रहने को मजबूर होना पड़ता था, लेकिन अब यह परेशानी इतिहास का हिस्सा बन गई है।

जिला प्रशासन और नारायणपुर पुलिस की साझा कोशिशों ने इस नामुमकिन काम को मुमकिन कर दिखाया है। कलेक्टर और प्रशासनिक टीम ने यह सुनिश्चित किया कि सरकार की 'सार्वजनिक वितरण प्रणाली' (PDS) का लाभ अबूझमाड़ के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक भी पहुंचे। राशन वितरण के दौरान गांव में उत्साह का माहौल था; बुजुर्गों ने बताया कि उन्होंने अपने जीवन में कभी नहीं सोचा था कि उनके दरवाजे पर सरकारी गाड़ी राशन लेकर आएगी। यह पहल न केवल भूख मिटाने की कोशिश है, बल्कि आदिवासियों का मुख्यधारा के प्रशासन पर भरोसा मजबूत करने की एक बड़ी कड़ी भी है।

नारायणपुर के दुर्गम गांवों तक पहुंच रहा यह अनाज इस बात का प्रमाण है कि विकास अब सिर्फ शहरों तक सीमित नहीं है। सरकार की इस योजना के तहत अब हर महीने इन गांवों में नियमित रूप से राशन पहुंचाने की रूपरेखा तैयार की गई है। इसके साथ ही, अब इन इलाकों में स्वास्थ्य और शिक्षा की सुविधाएं पहुंचाने पर भी जोर दिया जा रहा है। आदिवासियों के चेहरे की यह मुस्कान बता रही है कि अबूझमाड़ अब बदलाव की राह पर है और दशकों से अंधेरे में डूबे इन गांवों में अब विकास की नई रोशनी पहुंच रही है।

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